आंखों के विकास संबंधी शोध के लिए भारतीय शोधार्थी को मिली अनुदान

हेल्थ मंत्रा। बचपन मे ही जो अंधेपन का शिकार हो जाए, उसके लिए जीवन जीना कितना कठिन है वह तकलीफ बस वही समझ सकता है।  कोलोबोमा (बचपन में ही अंधेपन का शिकार हो जाने वाली एक बीमारी) के नाम से जानी जाने वाली यह बीमारी मां के गर्भ में ही बच्चे के विकास से जुड़ी हुयी होती है।

इस बीमारी के बारे में एक भारतीय ने शोध कर अपना परचम लहरा दिया है। सालों इस बीमारी के कारणों की खोज में लगे डॉक्टरों के लिए यह शोध अमृत बनने जा रहा है।  सीनियर भारतीय पोस्टडॉक्टरल फेलो डॉ. अमृता पाठक ने इस बीमारी से जुड़े कारणों पर एक विस्तृत शोध तैयार कर भारत का मान बढ़ा दिया।

उत्तर प्रदेश के फररूखाबाद में जन्मी और एसजीपीजीआई  लखनऊ से पीएचडी करके पिछले पांच सालों से नैशविले, टेनेसी, अमेरिका के वेंडरबिल्ट आई इंस्टीट्यूट से  रिसर्च कर रही डॉ. अमृता पाठक को आंखों के विकास और कोलोबोमा के कारणों के खोज के लिए 65 हजार डॉलर का अनुदान दिया गया है।

डॉ. अमृता के शोध में बताया गया है कि नेत्र विकास एक जटिल प्रक्रिया है जो मनुष्यों में गर्भ के तीसरे से 10वें सप्ताह के बीच होता है।

जानकारी के मुताबिक, एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया में यह एक क्षणिक फार्मेशन के बीच का अंतर है जिसमें वेंट्रल भ्रूण आंख (ऑप्टिक फिशर) के बंद करने और फ्यूज करने की आवश्यकता होती है।

समापन और संलयन (फ्यूजन) के लिए समय पर और संरचनात्मक फैशन में ऊतक (टिशूज) में प्रमुख सेलुलर परिवर्तन की आवश्यकता होती है।

यदि ऑप्टिक फिशर क्लोजर दोषपूर्ण है, तो परिणामस्वरूप कोलोबोमा (आंखों की संरचनाओं में नुकीले या अंतराल) जैसी जन्मजात असामान्यताएं होती हैं, जो 10% से अधिक बचपन में अंधापन का कारण बनती हैं।

ऑप्टिक फिशर क्लोजर के महत्व को जानने के बावजूद, प्रक्रिया के सेलुलर और आणविक विवरण अभी भी ज्ञात नहीं हैं।

डॉ अमृता पाठक के शोध का लक्ष्य मूलभूत विवरणों को समझना है जो उंगली के समान प्रोट्रेशन्स पर जोर देते हैं और जो गैप के अंतर और एक्टिन प्रोटीन से बने होते हैं।

इस शोध से प्राप्त आंकड़े और जानकारी कोलोबोमा के कारण बचपन में अंधापन और दृष्टि हानि को रोकने के लिए बेहतर चिकित्सीय विकास विकसित करने में मदद मिल सकेगी।

 

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3 thoughts on “आंखों के विकास संबंधी शोध के लिए भारतीय शोधार्थी को मिली अनुदान

  • August 9, 2018 at 1:59 pm
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    बेटी पढ़ाओ का सही उदहारण

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  • August 10, 2018 at 4:19 pm
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    बहुत-बहुत बधाई हो पाठक जी।

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