स्वन्त्रता दिवस विशेष—-अपनी राष्ट्रीय धरोहर संजोने में नाकाम विद्यालय बच्चों को क्या सिखाएंगे आजादी के मायने?

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(दीपक पाठक)

मीडियामंत्रा डेस्क। सबसे बड़े लोकतंत्र के स्वतंत्रता दिवस पर दुनिया भर से शुभकामनाओं का दौर जारी है। आज के दिन लाल किले से देश के प्रधानमंत्री और प्रदेश के मुख्यमंत्री ने भी इस उपलक्ष्य पर झंडारोहण कर नागरिकों को शुभकामनाएं दीं और आजादी के मायने वताये।

लेकिन इसी प्रदेश में एक ऐसी जगह भी है जहां देश के संविधान की प्रस्तावना लिखी पट्टिका का स्वतंत्रता दिवस के दिन भी सम्मान नहीं किया जा सका।

ऐसा क्यों है, और कैसे है, यह प्रश्न तो है ही लेकिन साथ ही इस पट्टिका के हो रहे अपमान का असल जिम्मेदार कौन है, यह जानना भी जरूरी है। यह पट्टिका कुछ दिन पहले की नहीं है इसे 45 साल पहले देश के 25वें स्वतंत्रता दिवस पर एक स्कूल में सुशोभित कर वाह-वाही बटोरी गयी।

वह स्कूल उत्तर प्रदेश के कन्नौज जिले में स्थित है। कन्नौज पूर्व माध्यमिक विद्यालय जलालाबाद में देश की आजादी की 25वीं सालगिरह पर संविधान की प्रस्तावना विषयक पट्टिका स्थापित की गयी। ऐसा शायद इसलिए किया गया हो जिससे विद्यालय समेत जिले भर के लोगों में संविधान की प्राथमिक जानकारी हो और देश में 1950 में स्थापित किए गए संविधान की मूल भावना की समझ होने के साथ ही इसका सम्मान किया जा सके।

लेकिन सम्मान किया गया हो या नहीं यह तो शोध का विषय हो गया है। क्योंकि, वर्तमान में इस पट्टिका के हालात विद्यालय और प्रदेश के सजग प्रशासन की भूमिका बयां कर रहे हैं।

विद्यालय में संविधान की प्रस्तावना के शब्दों से उकेरा गया पत्थर लगाया गया था। यह षिलालेख विद्यालय के सम्मान का सूचक तो था ही जनपद की भारतीय होने की गरिमा को चार-चांद लगा रहा था। लेकिन इस समय टूटी पड़ी यह पट्टिका अब धूल खा रही है। यह अनाथ हो गयी है। वह भी उस देश में जहां राष्ट्रीयता ही एक ऐसा धागा हो सकता है जिसमें हर किसी को पिरोया जा सके।

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