LKO  का ट्रिपल मर्डर—कैश वैन लूट काण्ड प्रकरण अब बंद

lootलखनऊ। कानून—व्यवस्था पर प्रहार करने वाला राजधानी के हसनगंज थाना क्षेत्र में हुआ कैश वैन लूट के दौरान तिहरा हत्याकाण्ड पर आखिरकार पुलिस ने फाइनल रिपोर्ट लगा दी। इस मामले में पुलिस का रवैया कैसा भी हो लेकिन अब मृतकों को न तो न्याय मिलेगा और न ही लूटा गया सरकारी धन।

नाकाम पुलिस का फाइनल रिपोर्ट लगाना हाईटेक तंत्र को जहां एक ओर कटघरे में खड़ा करता है वहीं दूसरी ओर खाकी के मुंह पर भी तमाचा है।

आपको बताते चलें, विगत वर्ष 2015 की 27 फरवरी की सुबह सीसीटीवी से लैस हसनगंज थानाक्षेत्र स्थित बाबूगंज में स्थित एचडीएफसी बैंक के एटीएम में कैश डालने पहुंची कैश वैन को घेरकर बाइकसवार तीन बदमाशों ने लूट लिया। लूट के दौरान वैन की सुरक्षा में लगे दो कर्मियों को गोलियों से भून दिया गया वहीं दूसरी ओर एटीएम की सुरक्षा में लगे सुरक्षागार्ड को भी गोलियों से छलनी कर दिया गया।

तत्कालीन S.S.P. ने बताया था ‘काम लोकल गुंडों का’

आपको जानकार हैरानी होगी कि घटना के महज आधे घंटे बाद मौके पर पहुंचे एसएसपी ने इसे लोकल गुंडों का कारनाम करार दिया था। उनको लगता था कि लोकल गुंडों ने ही रेकी कर घटना को अंजाम दिया। जिसके बाद लखनऊ विश्वविद्वायल के हास्टलों पर भी पुलिस ने छापेमारी की।

आज तक पुलिस भागने का रास्ता तक नहीं तलाश सकी

चौकाने वाली जानकारी यह है कि इस दुस्साहसिक घटना को अंजाम देने के बाद बदमाश किस तरफ से आसानी से निकलने में कामयाब हो गए, पुलिस इसका अबतक पता नहीं लगा पायी। वहीं उस दौरान सूत्रों से जानकारी मिली थी कि पेशेवराना अंदाज से हत्या व लूट करने वाले हत्यारे—लुटेरे वारदात को अंजाम देने के बाद नदवा कालेज की ओर से होते हुए पुलिस लाइन के रास्ते भागने में कामयाब हुए थे। हालांकि इस पूरे मसले में पुलिस ने न तो इंकार किया न ही इसे सच मानने की ताकत ही दिखा पायी।

डी.जी.पी. ने किया था झूठा खुलासा

इस सनसनीखेज वारदात का खुलासा तत्कालीन डीजीपी रहे ए.के. जैन ने स्वयं किया था। उन्होने बताया था कि तेलंगाना में हुए सिमी आतंकियों के एक एंकाउन्टर में दो आतंकी मारे गए जिसमे एक लखनऊ के अमीनाबाद का रहने वाला था। उसी ने तिहरे हत्याकाण्ड का ताना—बाना बुना। इससे राजधानी के अपराध में आतंकियों का शामिल होना भी माना जाने लगा।

लेकिन यह दावा इसलिए फुस्स हो गया जब मारे गए तथाकथित आतंकी की लोकेशन घटनास्थल पर मिली ही नहीं। यहां तक कि कुछ दिनों बाद चौंकाने वाला सच सामने आया कि एक जिम्मेदार अफसर ने नलगोंडा पुलिस से मिलीभगत करके फर्जी खुलासे की योजना बनाई थी। वहीं इस मामले तत्कालीन हसनगंज थानाप्रभारी चुपके से गुजरात जा पहुंचे और एक चर्चित गैंगेस्टर के ऊपर भी इसका ठीकरा फोड़ने की कोशिश की गयी लेकिन नाकामयाब रहे।

जानकारी के मुताबिक, लगभग 17 गैंगों का शामिल होना बताया गया। यही नहीं उसी दौरान काकोरी में हुए एक शातिर हिस्ट्रीशीटर की संदिग्ध मौत को आत्महत्या बताते हुए इस उस पर खुलासे के झूठे प्रयास किए गए थे। लेकिन यहां भी पुलिस की दाल नहीं गली।

वहीं दूसरी ओर तत्काली एएसपी दिनेश सिंह ने शिया कालेज के पास स्थित ग्राउंड में लूटे के कैश बॉक्स व उसके नोटों की गड्डियों के रबर बैंड दिखाते हुए मामले को ठंडा करने की कोशिश की। लेकिन इससे भी काम नहीं बना तो इस घटना को ही ठंडे बस्ते में डाल दिया गया।

यह थी वारदात
विगत 27 फरवरी 2015 की दोपहर बाइक सवार तीन बदमाशों ने बाबूगंज—हसनगंज में इस वारदात को अंजाम दिया था। हमलावरों के पास स्वचालित हथियार थे। 51 लाख की लूट व तिहरे हत्याकाण्ड पूरी घटना एटीएम व उसके आस—पास के दुकानों में मौजूद सीसीटीवी फुटेज में कैद हुयी थी। हमलावरों ने जिस तरह से घटना को कुछ ही मिनटों में अंजाम दिया था उससे साफ था कि घटना को बेहद सटीक व पुलिसिया अंदाज में अंजाम दिया गया।

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