B.J.P. ने Sapa का एक और विकेट गिराया

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लखनऊ । उत्तर प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार में स्वयं मुख्यमंत्री सहित मंत्रिमण्डल के उन सभी पांच सदस्यों को किसी न किसी सदन का सदस्य होने की अनिवार्यता को ध्यान में रखते हुए भाजपा लगातार प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी एवं बहुजन समाज पार्टी में सेंधमारी कर रही है।

पूर्व में सपा के दो और बसपा के एक विधान परिषद सदस्य को पार्टी और सदन की सदस्यता से इस्तीफा दिलाने की रणनीति कामयाब होने के बाद अब भाजपा ने सपा की एक और विधान परिषद सदस्य डा. सरोजनी अग्रवाल को भी ‘सम्मोहित’ कर अपने साथ कर लिया है।

विप सदस्य सरोजिनी अग्रवाल का इस्तीफा दे भाजपा में हुईं शामिल

समाजवादी पार्टी की विधान परिषद सदस्य डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने शुक्रवार को अपने पद से इस्तीफा दे दिया और तत्काल ही भाजपा में शामिल भी हो गयीं। विधान परिषद के सदस्य के तौर पर उनका कार्यकाल वर्ष 2021 में समाप्त होना था। डॉ. अग्रवाल इस्तीफा सौंपने विधान परिषद के सभापति के यहाँ पहुंची।

उनके पदचिन्हों पर चलते हुए उनकी पुत्री डॉ. हिमानी अग्रवाल ने भी सपा युवजन सभा के सचिव पद से इस्तीफा दे दिया। डा. अग्रवाल के सपा से मोहभंग कराने और भाजपा में शामिल होने में सूबे की काबीना मंत्री रीता बहुगुणा जोशी एवं राज्य मंत्री स्वतंत्र प्रभार महेन्द्र सिंह की बड़ी भूमिका रही।

उनकी मौजूदगी में ही डा. अग्रवाल ने कहा कि उन्हें समाजवादी पार्टी से कोई नाराजगी नहीं है। वो राजनीति में सक्रिय रहेंगी और राजनीति से इस्तीफा नहीं ले रही हैं। हालांकि उन्हें सपा संरक्षक मुलायम सिंह यादव को करीबी माना जाता रहा है। सपा से इस्तीफा देने के डॉ. सरोजिनी अग्रवाल ने कहा कि नेताजी (मुलायम सिंह यादव) के राष्ट्रीय अध्यक्ष पद से हटने के बाद पार्टी में मन नहीं लगता। पार्टी कमजोर हो रही है।

नेताजी के कारण दो बार विधान परिषद सदस्य बनी। समाजवादी पार्टी में सियासी विचार कमजोर हुआ है।
डॉ.सरोजिनी अग्रवाल 1995 में जिला पंचायत अध्यक्ष रहीं। तब से लगातार सक्रिय राजनीति में हैं। मेरठ जिले में सपा का एक बड़ा स्तंभ माना जाता रहा था। 2007 में पहली बार उन्हें मुलायम सिंह यादव ने एमएलसी बनाया था।

1996 से वे सपा की राष्ट्रीय सचिव हैं। अचानक इस्तीफा देकर भाजपा में शामिल होने से उनके समर्थकों को करारा झटका लगा है। वहीं उल्लेखनीय है कि मेरठ की निवासी डॉ. सरोजिनी अग्रवाल से पहले बुक्कल नवाब व यशवंत सिंह ने समाजवादी पार्टी के विधान परिषद सदस्य के पद से इस्तीफा दिया था।

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