U.P.  में नदियां का जलस्तर गिरा, पर दुश्वारियां बढ़ीं

लखनऊ । बाढ़ से प्रभावित चल रहे उत्तर प्रदेश के 24 जिलों के लिए राहत की खबर यह है कि नदियों का जलस्तर घटने लगा है लेकिन वहीं अब बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें और बढ़ती नजर आ रही हैं। अधिकांश गांवों में जलभराव होने से ग्रामीणों का सम्पर्क मुख्य मार्ग से कटा हुआ है। इससे ग्रामीणों को रोटी रोजी का संकट पैदा हो गया है। विद्यालयों में पानी भर जाने से शिक्षण कार्य बाधित है। दूषित जलभराव से संक्रामक बीमारियों ने पांव पसार लिये हैं। सूबे में बाढ़ के कारण अब तक 95 लोगों की मृत्यु हो चुकी है।

राज्य सरकार के प्रवक्ता के मुताबिक सूबे के गोरखपुर, बस्ती, सिद्धार्थनगर, गोण्डा, कुशीनगर, देवरिया, महराजगंज, बहराइच, फैजाबाद, बाराबंकी समेत 24 जिले बाढ़ से प्रभावित हैं। बाढ़ से करीब तीन हजार गांव की करीब 25 लाख की आबादी संकट में है।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का हवाई दौरा किया। पीड़ितों को राहत सामग्री बांटी, बावजूद इसके पीड़ित तंग हालात में हैं। यहां तक कि मुख्यमंत्री स्वयं मोटरबोट के जरिए बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में जाकर वहां लोगों से मिलकर उन्हें हरसंभव मदद का आश्वासन दिया।

इस दौरान उन्होंने यह भी आश्वस्त किया कि राहत सामग्री के वितरण में कोई कमी नहीं आने दी जायेगी। क्षतिग्रस्त मकानों की मरम्मत के लिये सरकार उनकी मदद करेगी। सरकार बाढ़ पीडितों के साथ खड़ी है।

उधर, गोंडा जिले के कर्नलगंज और तरबगंज तहसील क्षेत्रों में रौद्र रुप धारण कर तबाही मचा रही घाघरा और सरयू नदी में आयी बाढ़ से पांच सौ मजरों में बसी लगभग दो लाख की आबादी बाढ़ से प्रभावित है।

जानकारी के मुताबिक बाढ़ से ग्रामीणों को बचाने के लिये बने ऐल्गिन चडसडी और भिखारीपुर सकरौर तटबंधों की हालत दोनों नदियों के तेज बहाव से नाजुक होती जा रही है। तटवर्ती इलाकों में बसे लोगों ने सुरक्षित स्थानों पर डेरा जमा लिया है।

अधिकांश ग्रामीण अपने आशियाने को छोड़कर जाना नहीं चाहते। जिन्हें राष्ट्रीय आपदा मोचन बल, पीएसी, पुलिस और गोताखोर जवान राहत सामग्री पहुंचाने के लिये मोटरबोट, नाव, स्टीमर एवं अन्य संसाधनों से राहत सामग्री पहुंचा रहे हैं।

वहीं दूसरी ओर पड़ोसी जिले बस्ती से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार सरयू नदी की बाढ़ से एक सौ से अधिक गांव की 20 हजार से अधिक आबादी प्रभावित है। नदी खतरे के बिन्दु से 62 सेमी. ऊपर बह रही है। नदी का रूख स्थिर है लेकिन खतरे के बिन्दु 92.730 के बदले 93.350 मीटर पर बह रही है। सरयू नदी का दबाव बीडी बन्धे पर बना हुआ है तथा नदी 20 से अधिक स्थानो पर तेजी से कटान कर रही है।

जबकि बलरामपुर से प्राप्त रिपोर्ट के अनुसार जिले के 100 से अधिक गांव बाढ़ से घिरे हैं। राप्ती नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है। नेपाल सीमा से सटे तुलसीपुर, उतरौला और सदर तहसीलों के 100 से अधिक गांव बाढ़ से घिरे हैं।

इसी प्रकार सिद्धार्थनगर जिले में 600 गांव बाढ़ से प्रभावति हैं जबकि बाढ़ के पानी से 373 गांव चारों ओर से घिर गये हैं। राप्ती, बूढ़ी राप्ती और कूड़ा नदी खतरे के निशान से ऊपर बह रही है, हालांकि नदियों का जलस्तर धीरे-धीरे घटने लगा है लेकिन सुस्त रफ्तार के कारण जिले में बाढ़ पीड़ितों की मुश्किलें बरकरार है।

राप्ती नदी खतरे के निशान से 40 सेंटीमीटर ऊपर, बूढ़ी राप्ती एक मीटर 25 सेंटीमीटर ऊपर, कूड़ा 50 सेंटीमीटर ऊपर और जमुआर नाले के एक मीटर 30 सेंटीमीटर ऊपर बहने से जिले की पांचों तहसील के 600 से ज्यादा गांव बाढ़ की चपेट में हैं। इससे 373 गांव बाढ़ के पानी से चारों तरफ से घिरे हैं।

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