देर की तो शादी के रजिस्ट्रेशन पर भी ढीली करनी होगी जेब

लखनऊ । योगी सरकार द्वारा किए गए अनिवार्य विवाह पंजीकरण के फैसले के बाद इसकी फीस भी बढ़ा दी गयी है। पहले शादी के बाद कभी भी रजिस्ट्रेशन कराने पर महज 10 रूपए फीस वसूली जाती थी। लेकिन अब लेट फीस भी देनी पड़ेगी।

शादी की तारीख के एक साल के अन्दर अगर रजिस्ट्रेशन कराया जाता है तो 10 रूपए ही देने पड़ेंगे। उसके बाद जितने साल विलंब होगा, उतने ही पचास रुपये और शुल्क देना होगा। यानी दो साल विलंब होने पर सौ रुपये तो दस वर्ष बीतने पर पांच सौ रुपये शुल्क लगेगा।

उल्लेखनीय है कि कैबिनेट ने विवाह पंजीकरण अनिवार्य किए जाने के बाद इसकी जिम्मेदारी महिला एवं बाल कल्याण विभाग को सौंपी थी। इससे पहले हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को निर्देश दिया था कि विवाह पंजीकरण सभी धर्म के लोगों के लिए अनिवार्य किया जाए।

महिला एवं बाल विकास विभाग की प्रमुख सचिव रेणुका कुमार की ओर से जारी अधिसूचना में हिंदू शब्द हटाते हुए ‘उत्तर प्रदेश विवाह पंजीकरण नियमावली-2017 कर दिया गया है। पहले इसे ‘उत्तर प्रदेश हिंदू विवाह पंजीकरण नियमावली के रूप में जाना जाता था। अब सभी वर्गों को विवाह का पंजीकरण कराना जरूरी होगा। मुस्लिम दंपतियों को निकाह का पंजीकरण कराना होगा। अभी तक उनके निकाह में फोटो नहीं लगा करती थी लेकिन, पंजीकरण में ऐसा करना अनिवार्य होगा।

विवाह पंजीकरण ऑनलाइन किया जा सकता है। इसके लिए पति और पत्नी दोनों को ही विवरण के साथ आवेदन पत्र भरकर अभिलेखों को स्टाम्प एवं निबंधन विभाग की वेबसाइट पर अपलोड करना होगा। खास यह है कि जहां विवाह के पक्षकारों के आधार कार्ड के साथ उनके मोबाइल नंबर जुड़े हैं, वहां सूचनाओं के सत्यापन के बाद विवाह पंजीकरण प्रमाणपत्र स्वत: ही ऑनलाइन जनरेट किया जा सकता है।

घर बैठे इसका प्रिंट भी निकाल सकते हैं। मोबाइल नंबर के साथ आधार कार्ड न जुड़े होने पर पति-पत्नी दोनों को ही विवाह पंजीकरण अधिकारी के समक्ष उपस्थित होना होगा।

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