Governor ने 12 विधेयकों को राष्ट्रपति को भेजा

लखनऊ। प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक ने राज्य विधान मण्डल के दोनों सदनों से पारित विधेयकों पर निर्णय लेते हुए ‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) विधेयक 2017’ को अपनी हरी झण्डी दे दी है। इसके अलावा उन्होंने 12 विधेयकों को राष्ट्रपति को विचारार्थ भेजा है।
‘उत्तर प्रदेश लोक सेवा (अधिकरण) विधेयक 2017’ पारित होने से उत्तर प्रदेश लोक सेवा अधिकरण के अध्यक्ष तथा सदस्यों के पद प्राप्त करने की आयु में कमी की गयी है।

पूर्व में अधिकरण का अध्यक्ष 70 वर्ष की आयु तक तथा उपाध्यक्ष एवं सदस्य 65 वर्ष की आयु तक पद प्राप्त कर सकते थे परन्तु अब अध्यक्ष 65 वर्ष की आयु तथा उपाध्यक्ष एवं सदस्य 62 वर्ष की आयु तक पद प्राप्त कर सकेंगे।

राज्यपाल राम नाईक ने दोनों सदनों से पारित 12 विधेयकों को राष्ट्रपति को संदर्भित कर दिया है। राष्ट्रपति को संदर्भित किये जाने वाले विधेयकों में, उप्र दुकान और वाणिज्य अधिष्ठान (संशोधन) विधेयक 2017, ठेका श्रम (विनियमन और उत्सादन) (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, अन्तर्राज्यिक प्रवासी कर्मकार (नियोजन का विनियमन और सेवा शर्त) (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, मोटर परिवहन कर्मकार (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, न्यूनतम मजदूरी (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, औद्योगिक नियोजन (स्थायी आदेश) (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, विक्रय संवर्द्धन कर्मचारी (सेवा शर्त) (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, समान पारिश्रमिक (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, उत्तर प्रदेश औद्योगिक विवाद (संशोधन) विधेयक 2017, कारखाना (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017, भवन और अन्य सन्निर्माण कर्मकार (नियोजन तथा सेवा-शर्त विनियमन) (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 तथा मजदूरी संदाय (उत्तर प्रदेश संशोधन) विधेयक 2017 हैं।

उक्त विधेयकों के प्रस्तावित प्रावधानों से केन्द्रीय कानून प्रभावित होने के कारण विधेयकों पर राष्ट्रपति का अनुमोदन आवश्यक होता है जिस कारण पत्रावली राष्ट्रपति के विचारार्थ संदर्भित की गयी है।

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