नदी संस्कृति को बढ़ावा देने का समय-Yogi

yogi cmलखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि दुनिया की प्राचीनतम संस्कृति की पहचान गंगा को बचाने के लिए केन्द्र एवं राज्य सरकार मिलकर काम करेंगे।

उन्होंने गंगा को भारतीय सभ्यता एवं संस्कृति के विकास का माध्यम ही नहीं, बल्कि साक्षी बताते हुए कहा कि इसकी स्वच्छता एवं अविरलता बनाए रखने का दायित्व प्रत्येक नागरिक को उठाना होगा।

मुख्यमंत्री ने कहा कि एक बार फिर नदी संस्कृति को विकसित करने की आवष्यकता है अन्यथा उप्र मरूस्थल बन जायेगा।

‘नमामि गंगे जागृति यात्रा’ का किया शुभारम्भ

मुख्यमंत्री बुधवार को यहां होमगार्डस संगठन द्वारा आयोजित ‘नमामि गंगे जागृति यात्रा’ के शुभारम्भ के मौके पर अपने विचार व्यक्त कर रहे थे। उन्होंने बिजनौर से बलिया तक प्रस्तावित इस यात्रा की सराहना करते हुए कहा कि इससे आम जनता, व्यापारिक एवं सामाजिक संगठनों, नौजवानों, किसानों, छात्र-छात्राओं एवं पर्यावरण के प्रति जागरूक नागरिकों को ‘नमामि गंगे परियोजना’ से जोड़ने में सफलता मिलेगी।

ज्ञातव्य है कि यात्रा के दौरान प्रदेश के गंगा प्रवाह क्षेत्र के 25 जनपदों में एक लाख से अधिक होमगार्ड्स स्वयं सेवकों के माध्यम से सभाएं आयोजित कर जनचेतना जागृति करने का प्रयास किया जाएगा। यह यात्रा आगामी छह सितम्बर को समाप्त होगी।

अपने सम्बोधन में मुख्यमंत्री श्री योगी ने कहा कि प्रधानमंत्री ने जुलाई, 2014 में ‘नमामि गंगे’ परियोजना की शुरूआत की, जिसमें गंगोत्री से लेकर गंगा सागर तक गंगा की अविरलता को बनाए रखने के लिए 20 हजार करोड़ रुपए से अधिक का प्रावधान किया गया। प्रधानमंत्री के प्रयासों को गति प्रदान करने के लिए पांच जुलाई से अभियान चलाकर एक करोड़ 30 लाख से अधिक पौधों का रोपण किया गया।

अधिकांश रोपित किए गए वृक्ष पाकड़, आम, बरगद, नीम, पीपल, अशोक आदि औषधीय एवं परम्परागत प्रजातियों से सम्बन्धित हैं। उन्होंने कहा कि 25 जनपदों के उन 1,627 ग्राम पंचायतों को खुले में शौच से मुक्त कराया गया जो, गंगा के किनारे अवस्थित हैं। इसके साथ ही, विभिन्न टेनरियों, गन्दे नालों एवं सीवर के माध्यम से गंगा में प्रवाहित होने वाली गन्दगी को रोकने के लिए राज्य सरकार द्वारा गम्भीरता से प्रयास किया जा रहा है।

उन्होंने कहा कि निर्माणाधीन एसटीपी एवं आवश्यकतानुसार नई एसटीपी को प्रस्तावित कर इन्हें शीघ्र पूरा कराने का काम किया जा रहा है। गंगा एवं अन्य नदियों की स्वच्छता के लिए राज्य सरकार द्वारा एक प्रभावी समाधान योजना पर कार्य किए जाने की जानकारी देते हुए उन्होंने कहा कि इसे केन्द्र सरकार की मदद से पूरा किया जाएगा।

मुख्यमंत्री ने आमजन का आह्वाहन किया कि गंगा में किसी भी प्रकार की पूजन सामग्री एवं अन्य प्रकार के ठोस अपशिष्ट कतई न डाले जाएं। उन्होंने नागरिकों को उनकी जिम्मेदारी का ध्यान दिलाते हुए कहा कि नदियों की स्वच्छता हमारी वर्तमान एवं भावी पीढ़ी के विकास से सीधे जुड़ी है।

इसलिए इस मामले में सभी को पूरी जिम्मेदारी के साथ अपने कर्तव्य का निर्वहन करना होगा। उन्होंने गंगा के दोनों तटों पर बड़े पैमाने पर परम्परागत एवं औषाधीय पौधों के रोपण का आह्वाहन करते हुए कहा कि एक वर्ष में केन्द्र एवं राज्य सरकार तथा जनता की सहभागिता का परिणाम दिखाई पड़ने लगेगा।

उन्होंने गंगा की स्वच्छता को लेकर होमगार्ड्स संगठन द्वारा आयोजित ‘नमामि गंगे जागृति यात्रा’ की सराहना करते हुए कहा कि इस कार्य से संगठन के जीवन्तता का प्रमाण मिलता है। यदि उत्तर भारत में गंगा व यमुना जैसी नदियां न होती तो, यह क्षेत्र रेगिस्तान में तब्दील हो जाता। प्रकृति की कृपा से ऐसी नदियां यदि इस क्षेत्र में हैं तो, इन्हें बचाने का दायित्व भी यहां के लोगों का ही है।

Share this

media mantra news

Technology enthusiast

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *