पत्रकारिता के क्षेत्र में कड़ी प्रतिस्पर्धा हैं – Ram Naik

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लखनऊ। राज्यपाल राम नाईक ने पत्रकारिता के नवांकुरों को नसीहत देते हुए कहा कि आगे बढ़ने के लिए कड़े परिश्रम और गुणवत्तायुक्त काम करने की आवश्यकता होती है। कैमरे के एक क्लिक में सौ शब्दों से अधिक शक्ति होती है। चित्र अपने आप में लिखने से ज्यादा बोलते हैं। पत्रकारिता बहुआयामी है जिसमें कुशलता और प्रशिक्षण की जरूरत होती है।

राज्यपाल श्री नाईक की उपस्थिति में शनिवार को यहां पत्रकारिता एवं जनसंचार विभाग लखनऊ विश्वविद्यालय एवं दूरदर्शन लखनऊ के मध्य एक समझौता पत्र का आदान-प्रदान किया गया। इस अनुबंध के अनुसार पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं की लघु फिल्में, जो सामाजिक सरोकार से जुड़ी होंगी, दूरदर्शन लखनऊ द्वारा दिखायी जायेंगी।

इस अवसर पर कुलपति प्रो. एसपी सिंह, दूरदर्शन लखनऊ की सहायक निदेशक (कार्यक्रम) श्रीमती रमा अरूण त्रिवेदी, एपी मिश्रा वरिष्ठ कार्यक्रम अधिशासी, पत्रकारिता विभाग के प्रमुख डाॅ. मुकुल श्रीवास्तव, शिक्षकगण एवं छात्र-छात्रायें उपस्थित थे। कार्यक्रम का आयोजन विश्वविद्यालय के उमा हरिकृष्ण अवस्थी सभागार में किया गया था।

अपने सम्बोधन में राज्यपाल श्री नाईक ने कहा कि आज के समय में लोग कम समय में ज्यादा जानने के लिए समाचार देखते हैं। पत्रकारिता का क्षेत्र बहुत बढ़ गया है। कम से कम समय में अपनी पूरी बात प्रभावी ढंग से पहुंचाना ही कुशलता है। उन्होंने कहा कि छात्र-छात्राओं के लिए विश्वविद्यालय परिश्रम का क्षेत्र है जहाँ बहुत कुछ सीखने को मिलता है।

श्री नाईक ने भारत की आजादी में पत्रकारिता के योगदान का उल्लेख करते हुए कहा कि लोकमान्य बालगंगाधर तिलक ने ‘केसरी’ पत्रिका निकाली। बाद में उन्होंने ‘मराठा’ के नाम से अंग्रेजी में भी प्रकाशन शुरू किया। लोग उनके द्वारा लिखित अग्रलेख पढ़ने के लिए साप्ताहिक की राह देखते थे।

समय के साथ हर क्षेत्र में बदलाव आया है। आज अग्रलेख कम पढ़े जाते हैं बल्कि हर व्यक्ति अपनी रूचि के अनुसार समाचार पढ़ता है। बदलते हुए युग में पत्रकारिता में भी परिवर्तन आए हैं। उन्होंने कहा कि वर्तमान में पत्रकारिता के क्षेत्र में चाहे प्रिंट मीडिया हो या इलेक्ट्रानिक मीडिया, कड़ी प्रतिस्पर्धा हैं।

कुलपति प्रो. एसपी सिंह ने स्वागत उद्बोधन देते हुए कहा कि दूरदर्शन से हुए समझौता आदान प्रदान से पत्रकारिता विभाग के छात्र-छात्राओं की रचनात्मकता को जहाँ एक ओर प्लेटफार्म मिलेगा वहीं उन्हें कुछ बेहतर करने की प्रेरणा भी प्राप्त होगी। उन्होंने विभाग द्वारा प्रकाशित ‘संचार श्री’ एवं ‘कुलसंदेश’ पत्रिका की सराहना भी की। सहायक निदेशक (कार्यक्रम) श्रीमती रमा अरूण त्रिवेदी ने अनुबंध पत्र में प्रकाश डालते हुए कहा कि लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र-छात्राओं द्वारा तैयार की गई जनोपयोगी फिल्मों को दूरदर्शन द्वारा प्रसारित किया जाएगा।

उन्होंने कहा कि उचित प्रचार-प्रसार से छात्रों में आत्मविश्वास बढ़ेगा और कार्य में दक्षता भी आएगी।

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