किसानों के सवाल पर विधानसभा का पारा चढ़ा, समूचे विपक्ष ने किया बहिर्गमन

लखनऊ । किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर गुरुवार को पूरे दिन विपक्ष ने हर मौके पर सूबे की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने का कोई भी मौका नहीं चूका। वहीं सरकार ने हर बार दावा किया कि उसने सारे काम किसान हित के लिए ही किए हैं। लेकिन सरकार के उत्तर से असंतुष्ट होकर समूचे विपक्ष ने दो बार सरकार पर किसान विरोधी होने का आरोप जड़ते हुए सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

शून्यकाल के दौरान प्रमुख विपक्षी दल समाजवादी पार्टी के नरेन्द्र सिंह वर्मा, कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू व बसपा के लालजी वर्मा ने किसानों की विभिन्न समस्याओं को लेकर सरकार को कटघरे में खड़ा करने का प्रयास किया।

कार्य स्थगन प्रस्ताव के जरिए विपक्षी सदस्यों ने चर्चा की मांग करते हुए कहा कि गन्ना किसानों का 31 अरब चार करोड़ का भुगतान अभी बाकी है। सरकार ने गन्ना मूल्य में एक रुपए की भी वृद्धि नहीं की है।

सरकार ने धान का न्यूनतम समर्थन मूल्य 1750 रुपए घोषित किया है लेकिन धान क्रय केन्द्र अक्रियाषील होने के कारण किसान धान को 1300-1350 रुपए में बेचने का मजबूर है। इसी प्रकार किसान अपना आलू या तो औने-पौने भाव बेच रहा है या फिर फेंक रहा है।

कुल मिलाकर किसान परेषान है। इस पर सरकार की ओर से उत्तर देते हुए गन्ना राज्य मंत्री सुरेष राणा ने कहा कि पूर्ववर्ती सरकारों की उदासीनता के कारण गन्ना किसानों ने गन्ने की खेती से मुंह मोड़ लिया था लेकिन इस सरकार ने उनका भुगतान कराकर उन्हें प्रोत्साहित किया जिससे रकबा भी इस बार बढ़ गया है और गन्ने का उत्पादन भी। उन्होंने बताया कि इस बार 2017-18 में 111 करोड़ कुंतल गन्ने का उत्पादन हुआ है।

वहीं 120 लाख टन चीनी का रिकार्ड उत्पादन भी हुआ है। वहीं मंत्री अतुल गर्ग ने भी सरकार का बचाव करते हुए कहा कि किसानों से धान खरीद कर उनके खाते में सीधे आरटीजीएस के माध्यम से भुगतान कराया गया है। इस सरकार में बिचैलियों की भूमिका पूरी तरह से खत्म हो गयी है। बाद में सरकार पर किसानों की उपेक्षा का आरोप लगाते हुए समूचे विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

वहीं इससे पूर्व प्रश्नकाल के दौरान भी उवर्रकों के मूल्य को लेकर बसपा सदस्य रितेश पाण्डेय द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने दावा किया कि प्रदेष में आवष्यकता से अधिक उवर्रक उपलब्ध है और आज किसानों को लाइन लगाकर उवर्रक नहीं लेनी पड़ रही है।

वहीं खाद के दामों को लेकर उन्होंने कहा कि खरीफ की फसल के दौरान डीएपी खाद की कीमत 1088 रुपए से लेकर 1100 रुपए तक थी लेकिन पेट्रोलियम पदार्थों के मूल्य में वृद्धि हो जाने के कारण अब 1425 रुपए में डीएपी उपलब्ध है। बसपा के लालजी वर्मा व सुखदेव राजभर तथा विपक्ष के कई अन्य सदस्यों ने भी सरकार से सवाल जवाब किया। बाद में सरकार के उत्तर से असंतुष्ट होकर समूचे विपक्ष ने सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

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