Nitish के इस खुलासे से Bihar Politics   में आऐंगे कई मोड़

पटना। महागठबंधन, एक बिखरी हुयी राजनीतिक तस्वीर। लेकिन बिखराव हुआ क्यों, तमाम विश्लेषक अपनी—अपनी राय रखते हैं। लेकिन इतिहास के कुछ पन्नों का पलटा जाए तो मालूम चलेगा कि चाहे बिहार में महागठबंधन की सरकार ने 20 महीने तक रा किया, लेकिन इसके दो मुख्य राजनीतिक मुखौटों राजद व जनता दल यूनाइटेड के शीर्ष नेताओं लालू यादव व नीतीश कुमार के रिश्ते असहज ही रहे।

सोमवार को नीतीश ने जो कुछ पत्रकारों से कहा वह पार्टी के अन्दर चल रही गतिविधियों का खुलासा था। उन्होने कहा कि लालू चल रही सरकार के दौरान भी नीतीश के विधायकों को तोड़ने से बाज नहीं आए। उन्होने कहा कि गठबंधन टूटने के 15 दिन पहले से ही लालू व उनकी पार्टी विधायकों को प्रलोभन दे रही थी।

नीतीश ने कहा कि उस समय अपनी पार्टी को महागठबंधन के लिए डुबो देते क्या? हालांकि राजद ने इस आरोप पर कोई प्रतिक्रिया नहीं दी है, लेकिन पटना के राजनीतिक गलियारे में इस बात की चर्चा बहुत गरम थी।

खुद राजद के राजनीतिज्ञ इस बात को लेकर आश्वस्त थे कि लालू यादव अपने प्रभाव से जनता दल यूनाइटेड को विभाजित कर देंगे। राजद के नेता मानते हैं कि नीतीश ने सत्ता परिवर्तन के खेल को जिस चतुराई से अंजाम दिया उसके बाद नाखून चबाने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा था।

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