TAJMAHAL मकबरा है , तेजोमहालय नहीं — भारतीय पुरात्व सर्वेक्षण विभाग

आगरा। आइए हम याचिका डाले और मशहूर हो जाएं। ऐसा ही कुछ हुआ उत्तर प्रदेश में । राजधानी लखनऊ में रहने वाले एक वकील और उसके दोस्तों ने दुनिया के अजूबों में शामिल और पर्यटन के अहम हिस्से ताजमहल को शिवमंदिर बताते हुए याचिका दाखिल की थी। लेकिन लंबे समय से चली बहस के बीच भारतीय पुरातत्व विभाग ने स्थानीय कोर्ट में दाखिल की गयी अपनी रिपोर्ट में दावा किया है कि ताजमहल मंदिर नहीं है। बल्कि मुमताज की याद में बनाया गया एक मकबरा है।

गुरूवार को विभाग ने ये रिपोर्ट सौंपी है। जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि ताजमहल मंदिर नहीं है। एएसआई ने इस बात का खंडन किया है कि ताजमहल शिव मंदिर है।

ऐसा है यह मामला
उल्लेखनीय है कि लखनऊ के गोमतीनगर निवासी अधिवक्ता हरिशंकर जैन और उनके पांच साथियों ने एक याचिका दायर की थी। याचिका में कहा गया था कि ताजमहल मंदिर है। उन्होंने अपनी याचिका में ताजमहल को शिव मंदिर तेजोमहालय होने का दावा किया है।

इस याचिका में भारत सरकार और केंद्रीय पुरातत्व विभाग को पक्षकार बनाया गया है। दोनों की ओर से पैरोकार ने गुरुवार को कोर्ट में जवाब दाखिल किया। इस पर हरीशंकर जैन की ओर से अधिवक्ता राजेश कुलश्रेष्ठ ने आपत्ति दर्ज कराई। उन्होंने जवाब को अपूर्ण बताया। कहा कि यह जवाब पोषणीय नहीं है।

उन्होंने इस जवाब का प्रतिवाद करने के लिए कोर्ट से समय मांगा है। पीठासीन न्यायाधीश अभिषेक सिन्हा मामले की अगली सुनवाई 11 सितम्बर को करेंगे।

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