Corruption  में Asia में नम्बर 1  बना भारत – प्रमोद तिवारी

लखनऊ । कांग्रेस के वरिष्ठ नेता एवं राज्यसभा सांसद प्रमोद तिवारी ने फोब्र्स मैग्जीन में प्रकाशित लेख का हवाला देते हुए कहा है कि नवीनतम् सर्वे में प्राप्त आंकड़ों के अनुसार भारत देश आज एशिया महाद्वीप में भ्रष्टाचार में ‘‘नम्बर वन’’ पर पहुंच गया है, अर्थात एशिया महाद्वीप का सबसे भ्रष्ट देश बन गया है, यह देश के लिये एक शर्मनाक स्थिति है। जबकि लोक सभा के चुनाव में नरेन्द्र मोदी ने ‘‘भ्रष्टाचार मुक्त’’ भारत का वायदा किया था। इसके अलावा श्री तिवारी ने अर्थशास्त्रियों के आंकड़े देते हुए कहा कि नोटबंदी के कारण विकास दर 2.3 फीसदी घट गयी है।

रविवार को यहां जारी बयान में श्री तिवारी ने कहा कि ‘‘भ्रष्टाचार मुक्त सरकार’’ का सपना दिखाने वाली भारतीय जनतापार्टी सरकार के अधीनस्थ कार्यालयों मेे सरकारी कार्य के संपादन में रिष्वत की राशि में तेजी से इजाफा हुआ है।

आम जनता को हर छोटे-बड़े कार्य कराने के लिये पहले से कहीं अधिक ‘‘सुविधा शुल्क’’ देना पड़ रहा है, यह स्थिति केन्द्र, राज्य एवं निगमों में व्याप्त है। श्री तिवारी ने केन्द्र की मोदी सरकार पर कटाक्ष करते हुए कहा कि प्रधानमंत्री ने भारत को विश्व में ‘‘नम्बर एक’’ बनाने का वायदा चुनाव में किया था तो उन्होंने कम से कम अपना एक वायदा तो निभाया, विकास के क्षेत्र में न सही, नवजवानों की बेरोजगारी दूर करने में न सही, सामरिक क्षेत्र में न सही लेकिन गुजरात माॅडल के अनुसार कम से कम भारत देश को एशिया महाद्वीप में भ्रष्टाचार के क्षेत्र में ‘‘नम्बर एक’’ बना दिया है।

जिस राह पर पीएम एवं उनके मंत्री चल रहे हैं उससे स्पष्ट है कि भारत बहुत ही जल्द विश्व में भ्रष्टाचार के क्षेत्र में ‘‘नम्बर एक’’ हो जायेगा।
श्री तिवारी ने कहा है कि चालू वित्तीय वर्ष की प्रथम तिमाही अप्रैल-जून 2017 तक में जीडीपी (सकल घरेलू उत्पाद) घटकर 5.7 प्रतिशत दर्ज हुई है जो भारतीय जनतापार्टी सरकार के पिछले तीन साल के कार्यकाल का सबसे न्यूनतम् डीजीपी है।

विश्व बैंक के पूर्व वरिष्ठ वाइस प्रेसिडेन्ट और मुख्य अर्थशास्त्री कौशिक बसु ने कहा है कि वर्ष 2008 में वैष्विक संकट के समय कुछ समय के लिये यह 6.8 फीसदी थी किन्तु अब जब तेल मूल्य कम है और चीन की विकास दर घट रही है तो हमारी विकास दर फिर से आठ फीसदी से ऊपर पहुंचनी चाहिए थी किन्तु विकास दर 5.7 फीसदी होने का मतलब है कि नोटबंदी के कारण विकास दर 2.3 फीसदी घट गयी है।

श्री तिवारी ने कहा है कि परिणाम यह है कि नोटबन्दी से गरीब और आम आदमी का नुकसान हुआ, तथा वह और भी अधिक तंग हाल व परेशान हुआ, लेकिन 99 प्रतिशत बैंकों में धन जमा करने के उपरांत अमीर का कालाधन सफेद हो गया तथा वह और भी अधिक अमीर हुआ।

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