… Operation Ram Rahim की कुछ ऐसी अनकही सच्चाई जो अब तक रही बे—खबर

मीडियामंत्रा डेस्क । अब रामरहीम बाबा नहीं कैदी नंबर 8647 हो गया है। अब उसके आगे—पीछे उसके चेले—चपाटे नहीं बल्कि उसकों बड़ी जिम्मेदारी का काम मिला है वह भी ठीक उसके चरित्र के उलट। क्योंकि उसका काम पहले महकते फूलों को कुचलना था। लेकिन अब उसकी जिम्मदारी क्यारियों में सजे फूलों की रक्षा करना व सजाना—संवारना है। यही नहीं हर दिन लाखों की आमदनी करने वाले कैदी राम रहीम को घंटों काम करने के पर मजदूरी के रूप में महज 40 रूपए ही मिलेंगें।

इन सबके बीच इस पूरे प्रकरण में हरियाणा भाजपा को मीडिया ने खूब कोसा। लेकिन सच्चाई इसके ठीक उलट है। और इसका खुलासा किया है हरियाणा के होम सेक्रेटरी रामनिवास ने । उनका कहना है कि सरकार के लिए सबसे बड़ा चैलेंज रामरहीम को उसके सिरसा स्थित 800 एकड़ में फैले डेरे से बाहर निकालना था।

रामरहीम को डेरे से बाहर निकालना था चैलेंज

गुरमीत राम रहीम को आने वाले फैसले का अंदाजा था और वह अपने डेरे से बाहर निकलने के लिए तैयार नहीं था ऐसी स्थिति में प्रशासन के पास सिर्फ सिर्फ दो विकल्प है जिसमें पहला बल प्रयोग अगर यह ऑप्शन आजमाया जाता तो निश्चित तौर पर बहुत बड़ी जन हनी होती क्योंकि उसकी मांग में पांच से छह लाख समर्थक मौजूद थे और आगे महिला और बच्चों को रखा गया था अभी-अभी पुलिस या सेना वह प्रवेश करती तो निश्चित तौर पर हथियारों से लैस गुंडे महिला व बच्चों की आरती पुलिस व आर्मी पर हमला करते और जाने कितने मासूम भोले लोग महिला व बच्चों के साथ मारे जाते।

ऐसी स्थिति में हरियाणा सरकार और पुलिस प्रशासन ने एक कूटनीतिक फैसला लिया कि राम रहीम को विश्वास में लेकर उसे अपनी किलेबंदी से बाहर निकाला जाए ।

और सीबीआई कोर्ट में जहां पर पुलिस और पैरा मिलिट्री फोर्सेज ने किलेबंदी कर रखी है उसमें लाकर फंसा लिया जाए । चाहे उसके लिए उन्हें बदनामी का खतरा मोल ले लेना चाहिए क्योंकि कुछ उनकी बदनामी से कीमती लाखों समर्थकों की जान है । यह साहसिक फैसला मुख्यमंत्री ने अपने स्तर पर लिया।

पुलिस के अधिकारियों ने बताया कि प्रशासन ने बार-बार बाबा से गुहार लगाई कि उनके साथ कुछ खास नहीं किया जाएगा । डेरा समर्थकों को पंचकूला शहर आने दिया गया। खतरनाक हथियारों की जब्ती के सिवा देर रात तक उन पर ज्यादा कार्यवाही नहीं की गई। रामरहीम जो सारी कार्रवाई टीवी पर देख रहा था उसको इस विश्वास में लिया गया कि प्रशासन उस पर सख्ती नही करेगा। यही विश्वास दिलाने के लिए मुख्यमंत्री ने अपना विश्वास पात्र निजी सचिव कल सुबह राम रहीम से मिलने भेज दिया।

जैसे ही गुरमीत ने बाहर निकलने की इच्छा जताई। हरियाणा सरकार ने उन्हें पंचकूला की ओर अपने काफिले के साथ बढ़ने दिया और पंचकूला में घुसते ही धीरे धीरे उसके काफिले को कम करते गए और अंत में केवल उसकी मुंह बोली बेटी और छह सुरक्षा गार्डों के साथ पुलिस के चक्रव्यूह में घुसने दिया। चक्रव्यूह में घुसते ही उसके सुरक्षा गार्डों को पहले समझाया गया लेकिन उनके हिंसक होते ही बल प्रयोग से उन्हें काबू में कर लिया गया। लेकिन इतने सबके बाद प्रशासन की बात मानने के सिवा राम रहीम के पास कोई विकल्प नहीं बचा था।

हरियाणा पुलिस के 6 जवानों पर देशद्रोह का केस

बाबा रामरहीम को जैसे ही कोर्ट ने दोषी करार दिया प्रशासन ने तुरंत उन्हें आर्मी के वेस्टर्न कमांड के हेड क्वार्टर की ओर भेज दिया। ताकि पैरामिलिट्री आर्मी के चलते बाबा कहीं भाग ना सके। यह खबर पहले ही आ गई थी कि बाबा भागने की कोशिश कर सकता है, और ऐसी कोशिश की भी गयी। इसी के चलते अब हरियाणा पुलिस के 6 जवानों पर देशद्रोह का मुकदमा दर्ज हो गया है।

इतना ही नहीं प्रशासन ने एक मेक शिफ्ट हवाई पट्टी भी बनाई ताकि लोगों को यह धोखा दिया जा सके कि रामरहीम को यही से रोहतक भेजा जाएगा। जैसे ही बाबा को दोषी करार दिया, पैरामिलिट्री फोर्स ने रामरहीम को तुरंत पंचकूला सेशन कोर्ट से आर्मी बेस में स्थित हवाई पट्टी पर खड़े हेलीकॉप्टर पर बिठाकर रोहतक रवाना कर दिया।

गुरप्रीत के बाद हनीप्रीत करेगी डेरे की अगुवाई

अधिकारियों का कहना कि रामरहीम के साथ हनीप्रीत को इसलिए भेजा गया क्योंकि रामरहीम के बाद वही डेरे की अगुवाई करने वाली है। प्रशासन नहीं चाहता था कि हनीप्रीत कौर डेरा समर्थकों के सामने आए और समर्थकों को संबोधित करे। इसी के चलते हनीप्रीत को रोहतक जेल के गेस्ट हाउस तक ले जाया गया।

गेस्ट हाउस में जैसे ही रामरहीम को रखा गया उसके तुरंत बाद ही जेल अधिकारियों ने आकर सबसे पहले हनीप्रीत को वहां से हटाया और उसके बाद गुरप्रीत को रोहतक की सुनहरी जेल में स्थित उनके सेल में ले गए।

आज जैसे ही दोषी करार होने की सजा सूचना बाहर आई और समर्थकों ने उपद्रव शुरू किया तो पहले से तैयार सुरक्षाबलों ने तुरंत कार्यवाही करते हुए एक से डेढ़ घंटे के भीतर स्थिति पर पूरी तरह काबू पा लिया और इस कार्यवाही में 28 लोगों की जानें गई जो तुलनात्मक रुप से बहुत कम है यदि यह कार्यवाही राम रहीम को डेरे से बाहर निकालने के लिए बल का प्रयोग किया गया होता।

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