2016 से पहले कभी नहीं हुयी सर्जिकल स्ट्राइक — DGMO

नई दिल्ली। एक आरटीआई ने उन सभी राजनीतिक दलों का मुंह बंद कर दिया है जिन्होने नवंबर 2016 में हुए सर्जिकल स्ट्राइक पर केन्द्र सरकार की आलोचना करते हुए इसे राजनीतिक लाभ लेने की कोशिश करार दी थी। एक प्रतिष्ठित समाचार एजेंसी द्वारा लगाए गए आरटीआई के जवाब में देश के सैन्य अभियान महानिदेशालय (DGMO) ने आरटीआई के जवाब में ऐसा ही जवाब दिया है।

रक्षा मंत्रालय के एकीकृत मुख्यालय (सेना) स्थित डीजीएमओ ने आरटीआई के जवाब में कहा है कि 29 सितबंर 2016 से पहले किए गए किसी भी सर्जिकल स्ट्राइक का कोई रिकॉर्ड नहीं हैं।

डीजीएमओ ने कहा कि 29 सितंबर 2016 को एक सर्जिकल हुई थी। अपने जवाब में उसने कहा कि यह सेक्शन पहले हुई किसी अन्य सर्जिकल स्ट्राइक का रिकॉर्ड नहीं रखता है। डीजीएमओ ने इस मामले में प्रेस कांफ्रेंस में बयान जारी किया था।

आरटीआइ आवेदन में रक्षा मंत्रालय से पूछा गया था कि क्या 29 सितंबर 2016 के डीजीएमओ के बयान में बताई गई सर्जिकल स्ट्राइक भारतीय सेना के इतिहास में पहली है। यह भी पूछा गया था कि क्या सेना ने 2004 और 2014 के बीच सर्जिकल स्ट्राइक की है। मंत्रालय ने यह आवेदन एकीकृत मुख्यालय (सेना) के पास भेज दिया जिसने डीजीएमओ से सूचना मांगी।

आरटीआइ आवेदन में सर्जिकल स्ट्राइक की परिभाषा भी पूछी गई गई थी। इसके जवाब में डीजीएमओ ने कहा कि सर्जिकल स्ट्राइक एक अभियान है जो विशेष खुफिया सूचना के आधार पर की जाती है जिसका लक्ष्य न्यूनतम क्षति के साथ अधिकतम प्रभावी होना है। निशाने पर लिए गए क्षेत्र में सटीक कार्रवाई के बाद सैनिकों की जल्द वापसी होती है।

गौरतलब है कि 28 और 29 सितंबर 2016 की मध्यरात्रि में भारतीय सेना के कमांडो ने नियंत्रण रेखा पार कर गुलाम कश्मीर में आतंकियों के लांच पैड को नष्ट कर दिया था और करीब 20 आतंकियों को मार गिराया था।

इस सर्जिकल स्ट्राइक के बाद डीजीएमओ ने बयान में कहा था कि खुफिया सूचना मिली थी कि जम्मू-कश्मीर और देश अन्य प्रमुख शहरों में हमले के लिए आतंकी नियंत्रण रेखा पर इकट्ठा हुए हैं। इसके बाद भारतीय सेना ने आतंकियों की घुसपैठ से पहले ही उनके लांच पैड को नष्ट कर दिया।

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