Delhi  का जहरीला Dumping yard  बना जानलेवा, हुआ धमाका, 2 की मौत

नई दिल्ली। देश का दिल कही जाने वाली दिल्ली महज विकास व आधुनिकता के लिए नहीं पहचाना जाता। इसके इतर उत्तर भारत का सबसे बड़ा डंपिंग यार्ड के लिए भी दिल्ली कुख्यात है। और यही जहरीला डंपिंग यार्ड दिल्ली के सीमा से सटे राज्यों में बीमारी पैदा करने के साथ ही साथ आज जानलेवा हो गया।

हुआ यूं कि शुक्रवार को बारिश के चलते कूड़े के पहाड़ में ऐसी गैस पैदा हो गयी कि उसमें जबर्दस्त धमाका हुआ। इस धमाके में दो लोगों की मौत होने की पुष्टि हुयी है।

धमाका इतना जबर्दस्त था कि कूड़े के पहाड़ के किनारे स्थित नहर की लोहे की रेलिंग टूट गयी। यही नहीं रोड पर जा रही जेसीबी, कार व बाइक भी नहर में गिर पड़े।

घायलों को पास के अस्पताल में भर्ती कराया गया है। उल्लेखनीय है कि यह इलाका दिल्ली और गाजियाबाद का बॉर्डर है और सुबह-शाम भारी संख्या में लोग इस कूड़े के पहाड़ के किनारे से निकलते थे।

कूड़ें का पहाड़ है उत्तर भारत का सबसे बड़ा Dumping yard

दिल्ली के गाजीपुर इलाके में लैंडफिल साइट स्थित है। इसी जगह शहर भर का कचरा इकट्ठा किया जा सकता है। माना जाता है कि यह उत्तर भारत का सबसे बड़ा डंपिंग यार्ड है। लेकिन अब यह कूड़े के पहाड़ के रूप में दिल्ली के विकास की यात्रा को बयां कर रहा है। लगभग 70 एकड़ में फैले डंपिंग यार्ड में लगभग 3500 मैट्रिक टन कूड़ा डंप है।

यहां प्रतिदिन 600 से 650 ट्रक कूड़ा आता है. बताया जाता है कि लगातार कूड़ा आने से इस पहाड़ की ऊंचाई 50 मीटर से भी ज्यादा हो गई थी। जिस वजह से कई बार इसे बंद करने या कहीं और शिफ्ट करने की मांग उठ चुकी है।

NGT की फटकार के बाद भी नहीं सुधरा प्रशासन

विगत जुलाई में ट्रिब्यूनल के चेयरमैन स्वतंत्र कुमार ने कहा था कि राजधानी में रोजाना 14,100 टन ठोस कचरा निकलता है, लेकिन इसके निस्तारण के लिए दिल्ली सरकार के पास ना तो कोई मूलभूत ढांचा है और न ही कोई तकनीकी ज्ञान। ट्रिब्यूनल ने दिल्ली सरकार से पूछा था कि उसने भलस्वा, गाजीपुर और ओखला में स्थित कूड़ा निस्तारण की साइट पर कचरे के पहाड़ को कम करने के लिए क्या कदम उठाए।

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