बच्चों की मौत के दोषियों को बख्शा नहीं जायेगा-योगी,बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य निलंबित

chief

गोरखपुर/लखनऊ । उप्र के गोरखपुर नगर में बाबा राघव दास मेडिकल कालेज में हुई 30 बच्चों की मौत के बाद सूबे की योगी सरकार ने शनिवार को मेडिकल कालेज के प्राचार्य डा. राजीव मिश्र को गैर जिम्मेदाराना रूख अपनाने के लिए निलंबित कर दिया।

वहीं शनिवार को फिर से सात बच्चों के मौत की सूचना है। हालांकि इसकी तस्दीक करने से मेडिकल कालेज प्रशासन कतरा रहा है।

Oxygen नहीं मौत के कई और हैं कारण

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने देर शाम मीडिया के सामने आये और कहा कि बच्चों की मौतें के कई और कारण हैं। बच्चों की मौत के आंकड़े पूर्व के वर्षों में भी और अगस्त माह में लगभग ऐसे ही रहे हैं जैसे कि आज हैं। यह भी जोर देकर कहा गया कि आॅक्सीजन की कमी के कारण नहीं बल्कि अन्य कारणों से बच्चों की मौतें हुई हैं।

गोरखपुर में बड़ी संख्या में मौत की खबरें मीडिया की सुर्खियां बनने के बाद हरकत में आयी योगी आदित्यनाथ सरकार ने शनिवार सुबह अपने मंत्रिमण्डल के सहयोगी स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह तथा चिकित्सा षिक्षा मंत्री आशुतोष टण्डन को तलब कर लम्बी मंत्रणा की और दोनों को ही तत्काल गोरखपुर रवाना किया। देर शाम दोनों ही मंत्री मौके पर प्राथमिक जांच कर वापस लखनऊ लौटे और मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को तथ्यों से अवगत कराया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने भी घटना को गंभीरता से लेते हुए केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल को गोरखपुर जाने के निर्देश दिए। देर शाम वे लखनऊ भी पहुंच गयीं और एक फिर मुख्यमंत्री, सूबे के दोनों मंत्री एवं केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री व आलाधिकारियों के बीच हाई लेवल मीटिंग हुई। बैठक के बाद स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ अपने पूरे अमले के साथ मीडिया के सामने आये और कहा कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा।

साथ ही उन्होंने कहा कि अगर आक्सीजन की कमी से मौत हुई है तो इस मौत का मतलब जघन्य अपराध है। उन्होने कहा कि नौ तारीख को मैं खुद गया था और बीआरडी मेडिकल कॉलेज और घूमकर जाएजा लिया था। तब आॅक्सीजन को लेकर कोई भी तथ्य मेरे सामने नहीं लाया गया था।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मृत्यु के कई अन्य कारण रहे हैं लेकिन आक्सीजन से मौत का मतलब जघन्य अपराध होता है। उन्होंने बताया कि ऑक्सीजन सप्लायर की भूमिका की जांच के लिए कमेटी गठित की गई है। उन्होंने फिर दोहराया कि दोषियों को किसी भी हाल में बख्शा नहीं जाएगा और आवश्यक सेवाओं में कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

मुख्य सचिव करेंगे विस्तृत जांच

वहीं प्रदेश के चिकित्सा शिक्षा मंत्री आशुतोष टंडन ने बताया कि राज्य के मुख्य सचिव की अध्यक्षता में उच्चस्तरीय जांच का आदेश दे दिए गए है। जांच रिपोर्ट जल्द से जल्द हासिल करके दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। गैर जिम्मेदारी के लिए हम बीआरडी मेडिकल कालेज के प्राचार्य को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया गया है। श्री टंडन ने बताया कि एक अगस्त को आक्सीजन आपूर्ति करने वाले डीलर ने मेडिकल कालेज के प्राचार्य को पत्र लिखकर बकाया धनराशि का भुगतान करने के लिए कहा था।

पत्र महानिदेशक कार्यालय को भेजा गया और पांच अगस्त को बीआरडी मेडिकल कालेज को भुगतान कर दिया गया और सात अगस्त को रकम मेडिकल कालेज के खाते में आ गयी। टंडन के मुताबिक डीलर का दावा है कि उसे 11 अगस्त को भुगतान किया गया। भुगतान में विलंब क्यों हुआ ? जीवनरक्षक आक्सीजन की आपूर्ति क्यों रोकी गयी ? इन सभी सवालों पर मुख्य सचिव की अध्यक्षता वाली उच्चस्तरीय जांच में तथ्य सामने आयेंगे।

वहीं प्रदेष के स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थ नाथ सिंह ने बताया कि दस अगस्त को एक ही दिन में 23 मौतें हुई। लेकिन ऐसा पूर्व के वर्षों में भी और विशेषकर अगस्त के महीने में हुआ है। उन्होंने बताया कि साल 2014 में अगस्त के महीने में कुल 567 बच्चों की मौतें हुईं यानि 19 मौतें प्रतिदिन। इसी प्रकार 2015 में 668 यानि 22 मौतें प्रतिदिन तथा साल 2016 में 587 बच्चों की मौत हुई जो कि करीब 20 मौतें प्रतिदिन हो चुकी हैं।

उन्होंने कहा कि बच्चों की मौत के कई कारण हैं और उसमें आॅक्सीजन कारण नहीं है। उधर, केन्द्रीय स्वास्थ्य राज्य मंत्री अनुप्रिया पटेल ने कहा कि उन्हें प्रधानमंत्री मोदी ने विशेषरूप से भेजा है। जबकि केन्द्र स्वास्थ्य सचिव बीआरडी मेडिकल कालेज पहुंच चुके हैं। उन्होंने कहा कि इस पूरे घटनाक्रम की राज्य सरकार तो केन्द्र को रिपोर्ट भेजेगी ही, साथ ही मेरे मंत्रालय की ओर से भी वस्तुस्थिति से प्रधानमंत्री को अवगत कराया जायेगा।

इस बीच मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी से मौत का सिलसिला शनिवार को भी जारी रहा। शनिवार दोपहर को आईसीयू व ट्रामा सेंटर में ऑक्सीजन का प्रेशर काफी लो हो गया। सुबह से दोपहर तक सात और मौत होने की चर्चा है लेकिन इसकी वजह को लेकर असमंजस बरकरार है।

मेडिकल कालेज प्रशासन मौत को सामान्य बता रहा है तो परिजन मौत कल ही होने की बात कह रहे हैं। इनमें ज्यादातर मौतें अस्पताल में आॅक्सीजन की कमी होने की वजह से होने की बात कही गयी है, हालांकि राज्य सरकार ने इसका सिरे से खंडन किया है और कहा है कि बच्चों की मौत अलग-अलग वजह से हुई है।

उधर, अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई करने वाली कंपनी के ठिकानों पर छापेमारी की भी सूचना है। आरोप है कि कंपनी ने पैसे का भुगतान नहीं होने की बात कहते हुए अस्पताल में ऑक्सीजन की सप्लाई रोक दी थी। वहीं ऑक्सीजन सप्लाई करने वाली कंपनी ने दावा किया है कि अस्पताल में ऑक्सीजन सप्लाई नहीं कर पाने की बात पहले ही बता दी गयी थी।

कंपनी का कहना है कि एक अगस्त को ही गोरखपुर के जिलाधिकारी को इसकी जानकारी दे दी गयी थी। साथ ही डीजीएमई को भी मामले की जानकारी दी गयी थी। कंपनी ने गोरखपुर मेडिकल कॉलेज को भी पत्र लिख कर जानकारी देते हुए 63 लाख रुपये के बकाये का जिक्र किया था। मालूम हो कि मेडिकल कॉलेज में पुष्पा सेल्स भी ऑक्सीजन की सप्लाई करती थी।

इसके बाद विभाग ने ऑक्सीजन आपूर्ति से निपटने के लिए प्राधिकरण को तीन और 10 अगस्त को पत्र लिख कर सूचना दी कि बकाया भुगतान को लेकर पुष्पा सेल्स ने सप्लाई रोक दी है। इससे ऑक्सीजन की कमी हो गयी है।

Share this

media mantra news

Technology enthusiast

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *