जेई, एईएस से हुई मौतों का सही आंकड़ा छिपाने का आरोप लगा कांग्रेस ने किया बहिर्गमन

लखनऊ । प्रदेश की योगी आदित्यनाथ सरकार पर जेई और एईएस से इस साल हुई मौतों का गलत आंकड़ा देने और मीडिया पर इससे संबंधित खबरें करने पर प्रतिबंध लगाने का आरोप लगाते हुए कांग्रेस ने शुक्रवार को सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

वहीं इस संबंध में सरकार की ओर से दावा किया गया कि बीते सालों के मुकाबले इस साल इन रोगों से मृतकों की संख्या में अभूतपूर्व गिरावट आयी है।

साथ ही मीडिया पर प्रतिबंध लगाने के विपक्ष के आरोप को भी सरकार ने सिरे से खारिज कर दिया।

मानसून सत्र के अंतिम दिन प्रश्नकाल के दौरान कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू, सपा के मो. फईम इरफान व नितिन अग्रवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में चिकित्सा एवं स्वास्थ्य मंत्री सिद्धार्थनाथ सिंह ने जापानी इंसेफेलाइटिस (जेई) व एक्यूट इंसेफेलाइटिस (एईएस) की रोकथाम के लिए सरकार की कार्ययोजना को विस्तार से बताते हुए कहा कि साल 2017 में एईएस से ग्रसित 4650 मरीज भर्ती हुए इनमें से 579 की मृत्यु हो गयी।

2018 में इसी बीमारी से ग्रसित 2972 रोगी भर्ती हुए और मात्र 169 की मृत्यु हुई। इसी प्रकार साल 2017 में जेई से ग्रसित 674 मरीज भर्ती हुए इनमें से 169 की मृत्यु हो गयी।

2018 में 317 मरीज भर्ती हुए और मात्र 14 मरीजों की मौत हुई। उन्होंने बताया कि एईएस से होने वाली मौतों का प्रतिषत 12.45 से घटकर 5.69 तथा जेई का प्रतिषत 11.72 से घटकर 4.42 हो गया है।

उन्होंने कहा कि सरकार द्वारा चलाये गए व्यापक जनजागरूकता अभियान और अन्य उपायों के कारण यह स्थिति पैदा हुई है। उन्होंने बताया कि पीडियाट्रिक आईसीयू (पीक्यू) में वेंटीलेटरों की संख्या 102 से बढ़ाकर 202 कर दी गयी है।

अकेले गोरखपुर और बस्ती मण्डल में 1300 अतिरिक्त एनम की नियुक्ति की गयी है। वहीं 1160 चिकित्सकों की नियुक्ति के सापेक्ष 932 की नियुक्ति की जा चुकी है।

वहीं कांग्रेस सदस्य अजय कुमार लल्लू का कहना था कि पूर्वांचल के 38 जिले इन बीमारियों से प्रभावित हैं। इस साल कुल 2874 मरीज भर्ती हुए। अकेले गोरखपुर में 948 मरीज भर्ती हुए जिनमें से 268 की मौत हुई।

उन्होंने दावा किया कि इन रोगों से मृतकों की संख्या में दो फीसदी की वृद्धि हुई है। उन्होंने सरकार को घेरते हुए कहा कि पूर्व में मीडिया को प्रतिदिन बुलेटिन जारी किया जाता था लेकिन अब सरकार ने मृतकों की संख्या छिपाने के लिए मीडिया पर भी प्रतिबंध लगा दिया है।

वहीं सरकार ने विपक्ष के सारे आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया। जिसके बाद असंतुष्ट कांग्रेस सदस्यों ने सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

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