गोरखपुर मेडिकल कालेज में 24 घण्टे में 30 बच्चों की हुई मौत

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लखनऊ/गोरखपुर। उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के मूल स्थान माने जाने वाले गोरखपुर नगर के बाबा राघव दास यानि बीआरडी मेडिकल कालेज में ऑक्सीजन नहीं होने के चलते बीते 24 घण्टे में 30 बच्चों की मौत हो गयी। मरने वाले बच्चे एनएनयू वार्ड और इंसेफेलाइटिस वार्ड में भर्ती थे। हालांकि यदि बात बीती सात अगस्त से अब तक हुई मौतों के आंकड़े की हो तो यह संख्या 60 पहुंच चुकी है।

यह स्थिति तब हुई है जबकि अभी दो पहले ही स्वयं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मेडिकल कालेज का न सिर्फ दौरा किया था बल्कि करीब डेढ़ घण्टा वहां बिताने के साथ ही चिकित्सा व अन्य व्यवस्थाओं की समीक्षा भी की थी। अब इतनी बड़ी घटना हो जाने के बाद जांच के आदेष देकर पीछा छुड़ाया जा रहा है और जवाबदेही से बचने की तैयारी हो रही है।

मचा हड़कंप, जांच के आदेश

बीते 24 घण्टे में इतनी बड़ी संख्या में हुई मौतों के बाद हड़कम्प मच गया है। एक ओर इन मौतों के पीछे आक्सीजन की कमी को जिम्मेदार ठहराया जा रहा है वहीं मेडिकल कालेज प्रषासन अपनी गरदन बचाने के लिए इससे पल्ला झाड़ता दिख रहा है। बताया जा रहा है कि 69 लाख रुपये का भुगतान न होने की वजह से निजी फर्म ने ऑक्सीजन की सप्लाई ठप कर दी थी। यही निजी फर्म मेडिकल कालेज को आक्सीजन की आपूर्ति करती है। कहा जा है कि लिक्विड ऑक्सीजन तो गुरुवार से ही बंद थी और आज सारे सिलेंडर भी खत्म हो गए। जिसके बाद इंसेफेलाइटिस वार्ड में मरीजों ने दो घंटे तक अम्बू बैग का सहारा लिया।

इतनी बड़ी घटना होने के बाद भी डीएम या कमिश्नर में से कोई भी शुक्रवार को दिन भर बीआरडी मेडिकल कॉलेज नहीं पहुंचा। जबकि मेडिकल कॉलेज के डाक्टरों का कहना था कि दोनों अधिकारियों को मामले की जानकारी दे दी गई थी।

उधर, प्रदेश सरकार ने दावा किया है कि बीआरडी मेडिकल काॅलेज में आॅक्सीजन की कमी के कारण किसी की भी मौत नहीं हुई है। राज्य सरकार के प्रवक्ता ने बताया कि आॅक्सीजन की कमी से पिछले कुछ घण्टों में मेडिकल काॅलेज में भर्ती कई रोगियों की मृत्यु हो जाने से संबंधित समाचार भ्रामक हैं।

उन्होंने बताया कि इस समय गोरखपुर के जिलाधिकारी मेडिकल काॅलेज में मौजूद रहकर स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। प्रवक्ता ने यह भी कहा है कि मेडिकल काॅलेज में भर्ती सात मरीजों की विभिन्न चिकित्सीय कारणों से 11 अगस्त को मृत्यु हुई है।

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुधवार को ही लिक्विड ऑक्सीजन का टैंक पूरी तरह से खाली हो गया था। वहीं मंगाए गए ऑक्सीजन सिलेंडर भी खत्म हो गए। इसके बाद कालेज में हाहाकार मच गया। बताया जाता है कि बीआरडी में ऑक्सीजन की आपूर्ति का संकट गुरुवार को तब शुरू हुआ जब लिक्विड ऑक्सीजन प्लांट में गैस खत्म हो गई। संकट को देखते हुए गुरुवार को दिन भर 90 जंबो सिलेंडरों से ऑक्सीजन की सप्लाई हुई।

रात करीब एक बजे यह खेप भी खप गई। जिसके बाद अस्पताल में कोहराम मच गया। साढ़े तीन बजे 50 सिलेंडरों की खेप लगाई गई। यह सुबह साढ़े सात बजे तक चला। जानकारी के मुताबिक वार्ड 100 बेड में भर्ती इंसेफेलाइटिस के 73 में से 54 मरीज वेंटिलेटर पर हैं। सुबह साढ़े सात बजे ऑक्सीजन फिर खत्म हो गई। जिसके बाद वार्ड 100 बेड में हंगामा शुरू हो गया। एम्बुबैग के सहारे मरीजों को ऑक्सीजन दी गई।

जानकारी के मुताबिक बीआरडी में दो वर्ष पूर्व लिक्विड ऑक्सीजन का प्लांट लगाया गया। इसके जरिए इंसेफेलाइटिस वार्ड समेत 300 मरीजों को पाइप के जरिए ऑक्सीजन दी जाती है। इसकी सप्लाई पुष्पा सेल्स करती है। कंपनी के अधिकारी दिपांकर शर्मा ने प्राचार्य को पत्र लिखकर बताया है कि कालेज पर 68 लाख 58 हजार 596 रुपये का बकाया हो गया है।

बकाया रकम की अधिकतम तय राशि 10 लाख रुपये है। बकाया की रकम तय सीमा से अधिक होने के कारण देहरादून के आईनॉक्स कंपनी की एलएमओ गैस प्लांट ने गैस सप्लाई देने से इनकार कर दिया है। बताया जाता है कि बीआरडी में गुरुवार की शाम से ही बच्चों की मौत का सिलसिला शुरू हो गया। एक-एक कर बच्चों की हो रही मौत से परेशान डॉक्टरों ने पुष्पा सेल्स के अधिकारियों को फोन कर मनुहार की।

उधर कालेज प्रशासन ने 22 लाख रुपये बकाया के भुगतान की कवायद शुरू की। जिसके बाद पुष्पा सेल्स के अधिकारियों ने लिक्विड ऑक्सीजन के टैंकर को भेजने का फैसला किया। हालांकि यह टैंकर भी शनिवार की शाम या रविवार तक ही बीआरडी पहुंचेगा।

उधर, इतनी बड़ी घटना हो जाने के बावजूद बीआरडी मेडिकल कालेज के जिम्मेदार पदाधिकारियों का कहना है कि मेडिकल कालेज में आक्सीजन के सिलेंडरों की पर्याप्त संख्या है, इसलिए इन मौतों का कारण आक्सीजन की आपूर्ति में आयी बाधा नहीं है। हालांकि, जांच के आदेश दिये गए हैं।

बीती सात अगस्त से अब तक हुई 60 मौतें

जांच रिपोर्ट आने पर ही अंतिम रुप से कुछ कहा जा सकता है। उनका कहना था कि मेडिकल कालेज अस्पताल में मृत्यु होती रहती है। आंकड़ों के मुताबिक गत सात अगस्त को नौ, आठ अगस्त को 12, नौ अगस्त को नौ, दस अगस्त को 23 और आज सात मरीजों की मृत्यु की पुष्टि हुई है। हालांकि इन मौतों का कारण स्वाभाविक भी हो सकता है। जांच की जा रही है। यदि कोई गड़बड़ी होगी तो जांच में स्पष्ट हो जाएगा। दोषी पाये जाने वालों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

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