सामाजिक भेदभाव की बेडियों को तोड आगे बढती महिलायें

दीपक पाठक-

कन्नौज। समाज मंे आधी आबादी के नाम से जानी जाने वाली शक्ति स्वरूपा महिलायें समाज और परिवार की धुरी है। महिलाओं को दया नहीं अपितु समाज में सम्मान की दरकार है। आज की नारी समाज में अपना अहम स्थान कायम कर सशक्तिकरण और स्वालम्बन जैसे महत्वपूर्ण आयामों को भी छूती नजर आ रही हैं। ठीक उसके उलट समाज में शक्ति स्वरूपा नारी के साथ दोयम दर्जे की समस्या भी कहीं न कहीं बरकरार है। लैगिंक समानता का इंसानी हक आधी आबादी को आज भी हासिल नहीं है जबकि नारी शक्ति विश्व पटल पर अपनी अमिट छाप लगातार कायम कर रही है।

इत्र और इतिहास की नगरी कन्नौज की सरजमीं महिला प्रतिभाओं से अछूती नहीं है। समाज के हर पटल पर जनपद की महिलाओं ने न सिर्फ अपनी अमिट छाप छोडी है बल्कि उसकी निरंतरता को कायम भी रखा है। इसके कई जीवंत उदाहरण समाज में अपनी पहचान को को साकार रूप देते नजर आते है। समाज के भेदभावपूर्ण मिथकों को तोड तहलीज पार कर जिले में कई बेटियों के साथ-साथ बहुंओं ने भी विभिन्न क्षेत्रों में कीर्तिमान स्थापित किया है। जिसमें सबसे पहला नाम जिले की बेटी और पिता स्व0 पं0 रामप्रकाश त्रिपाठी पूर्व सहकारिता मंत्री की राजनैतिक विरासत को कायम रखने वाली प्रदेश सरकार में खनन एवं मद्यनिषेध राज्यमंत्री अर्चना पाण्डेय का आता है। इन्होने आधी आबादी के सम्मान व स्वाभिमान की रक्षा के लिये राजनैतिक व सामाजिक स्तर पर सूबे में कन्नौज की बेटियों के गौरव को बढाया है। तो वही तिर्वा स्टेट राजघराने की बहू रानी सुनीता सिंह ने भी समाजसेवा के साथ-साथ राजनैतिक पटल पर समाज के हित का बीडा उठाया है। प्रयागराज स्थित राजा डईया रियासत के राजा व हाईकोर्ट के न्यायाधीश रहे चन्द्रशेखर प्रसाद सिंह की बेटी रानी सुनीता सिंह ने 2002 में राजनैतिक परिवेश में कदम रखा और कांग्रेस में उच्चपदों पर रहने के बाद भाजपा मंे राजनीति की बागडोर को सम्भाल रही है, उन्होने अपने चाचा व पूर्व प्रधानमंत्री वीपी सिंह के साथ कई राजनैतिक आंदोलनों में हिस्सा लेकर दलित पिछडों व किसानों के अधिकारों की लडाई लडी। तो वही कांग्रेस नेत्री व गुरसहायगंज के वरिष्ठ चिकित्सक सुभाष चन्द्र दुबे की धर्मपत्नी ऊषा दुबे ने भी वर्ष 1981 में नगर से राजनैतिक सफर शुरू कर जनपद व प्रदेश तक में अपनी अमिट छाप छोडी वे 9 वर्षो तक जिलाध्यक्ष व तीन बार कांग्रेस में पीसीसी सदस्य रही और तबरीबन 10 वर्ष प्रदेश स्तर पर महिला विंग में भी महिलाओं के हक की लडाई लडी। तो वही सदर नगर पालिका परिषद की अध्यक्षा का दर्जा लेने वाली युवा हृदय सम्राट सुब्रत पाठक की माता सरोज पाठक अम्मा जी ने भी जिले में नये कीर्तिमान स्थापित किये, उन्होने पालिकाध्यक्ष के पद पर रहते हुये समाज हित में कई ऐतिहासिक कार्य किये है। इतना ही नहीं छिबरामऊ इलाके के कल्यानपुर गांव की समाजसेविका प्रतिभा मिश्रा ने भी ससुराल की दहलीज को पार कर समाजहित के लिये नये आयाम स्थापित किये बैंगलोर की मैडम कही जाने वाली प्रतिभा मिश्रा ने गांव के परिषदीय विद्यालय के बच्चों की तकनीकी शिक्षा के लिये कम्प्यूटर का तोहफा देकर समाज के अन्य वर्गो में भी साक्षरता की अलख को जगाया है। समाज को हक व न्याय दिलाने का बीडा उठाकर जनपद में आई एसीजेएम व जिला विधिक सेवा प्राधिकरण सचिव शिल्पी चैहान न सिर्फ महिलाओं को अधिकारों के प्रति जागरूक कर रही है बल्कि कानून व्यवस्था के माध्यम से उत्पीडन के विरूद्ध महिलाओं के पक्ष को मजबूती से न्याय दिलाने के कार्य को अंजाम दे रही है। जनपद में महिलाओं को व्यापार के प्रति जोडने के साथ साथ उन्हे स्वाबलम्बी व आत्मनिर्भरता की राह दिखाने वाली छिबरामऊ नगर पालिका अध्यक्ष राजीव दुबे की धर्मपत्नी व अखिल भारतीय उद्योग व्यापार मण्डल जिलाध्यक्षा शोभा दुबे भी नारी सशक्तिकरण की मिसाल है। समाजसेवा से लेकर व्यापारी संगठनों के जरिये महिलाओं को सम्मान व अधिकार दिलाने में उनका भी प्रमुख योगदान है। तो वही छिबरामऊ नेहरू महाविद्यालय की सचिव प्रबन्ध समिति इन्द्रा दुबे ने भी शिक्षा के साथ साथ समाज में बेटियों व महिलाओं को हस्तशिल्प के जरिये रोजगार परक शिक्षा देकर स्वाबलम्बी बनाया है। उनके द्वारा संचालित वामा महिला समिति के जरिये सैकडों निर्धन महिलायें और बालिकायें आज अपने पैरों पर खडे होकर परिवार का भरण पोषण कर रही है। जनपद में शिक्षा को नई दशा व दिशा देने के साथ-साथ गुणवत्ता को संवारने का कार्य करने वाली जिला बेसिक शिक्षा अधिकारी दीपिका चतुर्वेदी ने भी बालिका शिक्षा सहित महिलाओं को साक्षर बनाने जैसे तमाम जागरूकता अभियानों से सार्थक प्रयास किये है। इतना ही जिले की बेसिक शिक्षा को सरल और अद्वितीय बनाने के लिये भारत सरकार के मानव संसाधन विकास मंत्रालय के केन्द्रीय मंत्री द्वारा सम्मानित भी किया जाना है। तो वही शिक्षा की नींव बेसिक शिक्षा को नित नये आयाम और विद्यालय में बच्चों को नवाचार के जरिये बेहतर शिक्षा देने के साथ साथ नौनिहालों को लैपटाप से पढाकर परिषदीय विद्यालयों को संदेश देने वाली अंग्रेजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय जसपुरापुर सरैया प्रथम की प्रधानाध्यापिका रेनू कमल भी आदर्श शिक्षा है उन्होने भी पिछले दिनों आईसीटी की द्वितीय राज्य स्तरीय प्रतियोगिता में जिले का नाम रोशन किया है। जबकि अंगे्रजी माध्यम प्राथमिक विद्यालय आसकरनपुर्वा की प्रधानाध्यापिका सरिता गौतम ने भी परिषदीय विद्यालयों को संदेश देते हुये विद्यालय की व्यवस्था और वातावरण में कई नवीन कीर्तिमान स्थापित किये है। स्वच्छता से लेकर कला प्रतियोगिताओं तक उनके विद्यालय को भी कई बार सम्मान मिला है। साथ ही जिले की बेटी और साक्षरता अभियान में जिला समन्वयक रही रमन कटियार ने भी एनजीओ और स्वयं सहायता समूहों के जरिये महिलाओं, बच्चों सहित दिव्यांगों को जागरूक कर स्वाबलम्बी बनाने में अहम भूमिका निभाई है। उन्होने समाजसेवा के साथ-साथ साक्षरता, कन्याभू्रण हत्या जैसे अभियानों को चलाकर जागरूकता का संचार किया है। महिलाओं को स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति सजग रखने और मलिन बस्तियों सहित स्कूलों में कैम्प के माध्यम से जागरूकता अभियान चलाने वाली छिबरामऊ की महिला दंत चिकित्सक अनीता सिंह के योगदान को भी नजरअंदाज नहीं किया जा सकता। समय-समय पर उनके द्वारा स्वास्थ्य जागरूकता कैम्प के द्वारा महिलाओं को स्वच्छता व स्वास्थ्य के प्रति जागरूक किया जा रहा है। उनके संघर्षमय सफर तक पहुंचने में वे अपनी माॅं पुष्पा सिंह को प्रेरणाश्रोत बताती है। वही जनपद में महिलाओं को सुरक्षा व न्याय दिलाने के कार्य को अंजाम दे रही तेज तर्रार महिला थाना प्रभारी पूनम अवस्थी भी समाज में व्याप्त भेदभाव को दूर करने के लिये जागरूकता कार्यक्रमों को सफल बनाने के लिये न सिर्फ बढ-चढ कर कार्य कर रही है, बल्कि महिला सुरक्षा को लेकर जारी हेल्पलाइनों की जानकारी के जरिये महिलाओं की ढाल भी बनी हुई है। वर्ष 2001 से सेवा में आई पूनम अवस्थी को सराहनीय कार्य के लिये डीजीपी द्वारा सम्मानित भी किया जा चुका है। तो वही निरीक्षक के पद पर जिले में तैनात अंकिता वर्मा भी महिलाओं की सुरक्षा और सामाजिक व्यवस्था में सुधार लाने को तत्पर है वे अपनी शिक्षा के दौरान तलवारबाजी में नेशनल चैम्पियन रह चुकी है। उनका मानना है कि महिलाओं को आत्मनिर्भर होना चाहिये। साथ ही जिले के सहायता प्रकोष्ठ में तैनात निरीक्षक मंजू कनौजिया पति की मृत्यु के बाद 2001 में पुलिस सेवा में आई और लगातार महिलाओं की सुरक्षा व उन्हे न्याय दिलाने के प्रति निरंतर प्रयत्नशील है। उन्हे भी सेवा में रहते हुये परिवार परामर्श के मामलों के निस्तारण के लिये सम्मानित किया जा चुका है।

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