नए मेडिकल कालेज के नाम को लेकर मंत्री और सांसद के बीच ठनी

बहराइच। प्रदेष में नामों को लेकर राजनीति इन दिनों चरम पर है। कभी मुगलसराय का नाम बदला जाता है तो कभी इलाहाबाद का। अब जिले में निर्माणाधीन मेडिकल कालेज के नामकरण को लेकर सूबे की योगी सरकार में मंत्री और पार्टी की ही एक सांसद के बीच ठन गयी है। विवाद सिर्फ इस बात को लेकर है कि भाजपा सरकार में बेसिक शिक्षा राज्य मंत्री (स्वतंत्र प्रभार) अनुपमा जायसवाल ने मेडिकल कालेज का नाम पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय अटल बिहारी बाजपेयी के नाम पर रखने की मांग की है तो वहीं भाजपा सांसद सावित्री बाई फुले इसे महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखने पर अड़ी हुई हैं। इन दोनों के झगड़े में सरकार को अनिर्णय की स्थिति में ला दिया है।

उल्लेखनीय है कि नेपाल सीमावर्ती बहराइच जिला मुख्यालय पर 190 करोड़ रुपये की लागत से मेडिकल कालेज का निर्माण चल रहा है। सरकार का प्रयास यही है कि अगले लोकसभा चुनाव से पहले इसे क्रियाषील कर दिया जाये। पार्टी को 2014 के लोकसभा और उसके बाद 2017 में उप्र विधानसभा चुनाव में पूर्वी अंचल में अच्छी सफलता हासिल की थी। इस क्षेत्र के पिछड़ों को लुभाने के लिए फरवरी 2016 में पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने बहराइच में राजा सुहेलदेव की प्रतिमा का अनावरण कर पार्टी के लिए राजा सुहेलदेव का महत्व जता दिया था। 2017 के विधानसभा चुनावों में भी राजा सुहेलदेव के नाम का भरपूर इस्तेमाल पार्टी ने किया था। पार्टी की सांसद सावित्री बाई फुले का कहना है कि निर्माणाधीन मेडिकल कालेज का नाम पहले से महाराजा सुहेलदेव के नाम पर रखना तय था। इसलिए इसका नामकरण महाराजा सुहेलदेव के नाम पर ही होना चाहिए। मैं इसके लिए पहले भी मांग कर चुकी हूं, अब फिर से पत्र लिखने जा रही हूं।

वहीं योगी सरकार में राज्यमंत्री अनुपमा जायसवाल ने तीन दिन पूर्व कहा था कि बलरामपुर लोकसभा क्षेत्र पूर्व प्रधानमंत्री भारत रत्न स्वर्गीय अटल बिहारी वाजपेयी की कर्म भूमि रही है। एक जमाने में वो यहां से चुनाव लड़ते रहे। इस लोकसभा क्षेत्र में उन दिनों बहराइच का कुछ हिस्सा भी शामिल था। इस कारण बहराइच व आसपास के जनपदों से उनका खासा लगाव रहा है। इसी बात को आधार बनाकर स्थानीय विधायक व सूबे की मंत्री अनुपमा जायसवाल ने इसका नाम अटल जी के नाम पर रखने की मांग का पत्र प्रदेश के मुख्यमंत्री व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री को भेजा है। अब यह प्रकरण दोनों के लिए नाक का सवाल बन गया है। उधर, सरकार और पार्टी के लिए दोनों को ही संतुष्ट करने में खासी माथापच्ची करनी पड़ रही है।

Share this

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *