आतंकवाद का जवाब जरूरी लेकिन युद्ध जैसी परिस्थितियों से बचना होगा

वाराणसी-पुलवामा आतंकी घटना में जवानो की शहादत और उसके बाद देश में व्याप्त शोक और रोष के माहौल में एक साझा संस्कृति मंच के तत्वावधान में सैनिकों की शहादत एवं शान्ति के सवाल विषयक संगोष्ठी और श्रद्धांजलि सभा का आयोजन  डा अम्बेडकर स्मारक पार्क कचहरी पर किया गया जिसमे विभिन्न सामाजिक संगठनों के प्रतिनिधि, चिंतक और कलाकार शामिल हुए. संगोष्ठी के बाद कैंडिल जला कर मौन रखते हुए विगत दिनों शहीद हुए वीर जवानो को श्रद्धा सुमन अर्पित किया गया.

देश में व्याप्त तनाव के माहौल को चिंतनीय बताते हुए वक्ताओं ने कहा कि आतंकवाद का मुहतोड़ जवाब दिया जाना चाहिए, इसे संरक्ष्ण देने वाली शक्तिओं से भी सख्ती से निबटना होगा, ख़ुफ़िया एजेंसी को और चैतन्य करना होगा फिर भी युद्ध की भयावहता को ध्यान में रखते हुए देश को ऐसी परिस्थितियों से जाने से बचना होगा कोई जिम्मेदार देश युद्ध के लिए तभी तैयार होगा, जब कुछ असाधारण घट जाए। ऐसा इसलिए है क्योंकि युद्ध का खर्च ‘बहुत अधिक’ होता है। विश्लेषक कितना भी अच्छा हो, उसके लिए युद्ध के परिणाम का सटीक परिणाम लगाना कभी आसान नहीं होता। युद्ध के परिणाम अक्सर कल्पना से परे होते हैं, इस लिए युद्ध को भरसक टालने की कोशिश होनी चाहिए

वक्ताओं ने आगे कहा कि भारत और पाकिस्तान  दोनों परमाणु शक्ति संपन्न देश हैं। दोनों ही पक्षों में ‘शांतिप्रिय’ लोगों की अपेक्षा ‘आक्रामक’ लोग अधिक हैं। ‘आक्रामक’ लोग वे हैं, जो युद्ध छेड़ देने में विश्वास रखते हैं,   ये वर्ग ही युद्ध के पक्ष में सबसे ज्यादा हुंकार भरते हैं क्योंकि उनमें से कोई भी ‘युद्धगस्त क्षेत्र’ में नहीं रहता, जहां उनकी जिंदगी ही दांव पर लग जाती। निश्चित रूप से कभी-कभी सरकार के पास युद्ध चुनने के अलावा कोई विकल्प नहीं रहता, लेकिन व्यवहारिक यह होता है कि युद्ध हमेशा आखिरी विकल्प हो, पहला नहीं।

वर्तमान परिस्थितियों और टीवी चैनल पर लगातार चल रही बहस का उल्लेख करते हुए वक्ताओं ने कहा कि पिछले कुछ दिनों में जनता के बीच यह मांग जोर पकड़ती दिखी है कि भारत को पाकिस्तान पर चढ़ाई कर देनी चाहिए क्योंकि हमारे जवान लगातार शहीद हो रहे हैं।  सरकार से लोगों को यही अपेक्षा है कि वह ‘आक्रामकता’ के साथ देश के हितों की रक्षा करे केवल बोले नहीं बल्कि करके भी दिखाए। किन्तु प्रत्येक सरकार देश की अखंडता एवं संप्रभुता बरकरार रखने के लिए जिम्मेदार है और नागरिकों की भी यही अपेक्षा होती है, अतः सरकार पर भावनात्मक दबाव बनाने से बचना होगा.  सभा में मुख्या रूप से फादर आनंद, नीति भाई, सिद्दार्थ भाई, वल्लभाचार्य पांडेय, बिंदु सिंह, जागृति राही, अनूप, सुरेश, सुरेंद्र, फादर दिलराज, मिथलेश दूबे, सतीश सिंह, दीन दयाल सिंह, गौतम, प्रेणना कला मंच के मुकेश, अजय पाल, सुजीत गौरव, संदीप, अतुल, शशांक, अभय, विजय, आदि लोग शामिल रहे।

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