राजस्थान में बसपा ‘एकला चलो’ की नीति पर, किसी से समझौता नहीं

लखनऊ। मध्य प्रदेश व छतीसगढ़ विधानसभा चुनाव में अपनी रणनीति साफ कर देने के बाद अब बहुजन समाज पार्टी ने अकेले अपने दम पर राजस्थान में चुनाव लड़ने के लिए कमर कस ली है। पार्टी ने राज्य की सभी दो सौ सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारने की तैयारी में है। राजस्थान में अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति के मतदाताओं में बसपा की अच्छी पैठ है। पिछले लोकसभा व विधानसभा चुनावों में बसपा ने धौलपुर, भरतपुर, दौसा व गंगानगर में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया था।

आंकड़ों गवाह हैं कि 2013 के विधानसभा चुनाव में बसपा ने तीन सीटें जीती थीं। इसके अतिरिक्त आधा दर्जन से ज्यादा सीटों पर पार्टी के प्रत्याशी भाजपा प्रत्याशियों से मामूली अन्तर से चुनाव हारे थे। वर्ष 2003 में बसपा ने 124 सीटों पर चुनाव लड़ा था, दो पर जीती और उसे 3.98 प्रतिशत वोट मिले, वहीं 2008 में विधानसभा चुनाव में बसपा का प्रदर्शन सबसे अच्छा रहा, जब उसने 7.60 प्रतिशत वोटों के साथ छह सीटों पर जीत दर्ज की। 2013 में उसने 195 सीटों पर चुनाव लड़ा और तीन जगह उसे जीत भी मिली, लेकिन उसका वोट प्रतिशत घटकर 3.37 प्रतिशत रह गया। प्रदेश में अनुसूचित जाति की 34 व अनुसूचित जनजाति की 25 सीटें हैं। गत विधानसभा चुनाव में बसपा ने 195 सीटों पर प्रत्याशी उतारे थे। इस बार पार्टी सभी सीटों पर प्रत्याशी उतारने की तैयारी कर रही है। पार्टी सूत्रों के मुताबिक हर सीट पर जिताऊ प्रत्याशियों के नाम मांगे गए हैं। माना जा रहा है कि अगले सप्ताह प्रत्याशियों की सूची जारी हो सकती है।

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