प्रवासी दिवस की तारीख बदल भाजपा सरकार ने किया राष्ट्रपिता का अपमान

लखनऊ। प्रदेश कांग्रस अध्यक्ष राजबब्बर ने कहा है कि जब राष्ट्रपिता महात्मा गांधी दक्षिण अफ्रीका से 9 जनवरी 1915 को भारत लौटे थे तो उसी की याद में 9 जनवरी को ‘‘प्रवासी भारतीय सम्मेलन’’ वर्ष 2003 से लगातार मनाया जाता चला आ रहा है किन्तु हमारे प्रधानमंत्री ने राष्ट्रपिता के स्मरण में निर्धारित इस तिथि को भी चुनावी एजेण्डे में बदल दिया है।

उन्होंने कहा कि प्रधानमंत्री उस यादगार तिथि 9 जनवरी के बजाये 21, 22 एवं 23 जनवरी को प्रवासी दिवस मना रहे हैं जो कतई उचित नहीं है और यह राष्ट्रपिता का अपमान है क्योंकि वह हमारे राष्ट्र के गौरव और प्रेरणास्रोत हैं।

प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने कहा कि वस्तुतः यह भारतीय समाज की खूबसूरती रही है कि हमने हमेशा अपने उन लोगों जो हमारे बीच से दुनिया के विभिन्न स्थानों पर गये और उन्होने अपने-अपने क्षेत्र में विशिष्ट ख्याति और स्थान अर्जित कर विश्व में भारत की प्रतिष्ठा को स्थापित किया उनका सम्मान और उनकी योग्यता क्षमता से अपने देश को लाभान्वित करना हमारी विशाल परम्परा का हिस्सा रहा है। जिसमें श्वेत क्रान्ति के जनक प्रो. वर्गीज कुरियन, सूचना क्रान्ति के जनक डा. सैम पित्रोदा, हरित्र क्रान्ति के जनक डा. स्वामीनाथन, आधार के जनक डा. नन्दन नीलकर्णी, भारतीय अर्थव्यवस्था की समृद्धि के प्रतीक पुरूष डाॅ. मनमोहन सिंह, रघुराज राजन आदि सैंकड़ों ऐसे महापुरूष हैं जिनकी प्रतिभा का उपयोग करके कांग्रेस पार्टी ने भारत देश को बुलन्दियों पर पहुंचाने का काम किया है।

उन्होंने कहा कि यह गर्व की बात है कि एनआरआई से सबसे ज्यादा फायदा एफडीआई के रूप में दक्षिण भारत के तीन राज्यों केरल, तेलंगाना और आन्ध्र प्रदेश को होता है जहां केरल की पूरी अर्थव्यवस्था का 47 प्रतिशत पैसा खाड़ी देशों खासकर दक्षिण एशिया में बसे हमारे प्रवासी भारतीय भाइयों द्वारा आता है। उन्होने कहा कि लेकिन हमारे मौजूदा प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी अपने पूरे कार्यकाल में केवल ‘‘इवेन्ट’’ ही कर रहे हैं।

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