अयोध्या को लेकर केन्द्र सरकार के कदम सरकारी हस्तक्षेप

लखनऊ । बहुजन समाज पार्टी की मुखिया एवं उप्र की पूर्व मुख्यमंत्री मायावती अयोध्या में अधिगृहीत भूभाग राम जन्मभूमि न्यास को वापस लौटाने के लिए केन्द्र सरकार द्वारा उच्चतम न्यायालय में याचिका दायर करने को ‘सरकारी हस्तक्षेप’ करार दिया है।

उन्होंने इसे लोकसभा चुनाव से पहले चुनाव को प्रभावित करने की नीयत वाला ‘विवादित’ कदम भी बताया है।

बसपा मुखिया ने बुधवार जारी एक बयान में कहा कि इनकी (केन्द्र सरकार) अयोध्या भूमि विवाद के सम्बंध में अधिग्रहित भूमि का भूभाग रामजन्म भूमि न्यास को वापस लौटाने हेतु सुप्रीम कोर्ट में अर्जी देने की कल की कार्रवाई जबर्दस्ती सरकारी हस्तक्षेप के साथ-साथ लोकसभा चुनाव से पूर्व चुनाव को प्रभावित करने की नीयत वाला संकीर्ण सोच का विवादित कदम है।

उन्होंने कहा कि इससे देश की आम जनता को बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है।

बसपा नेत्री मायावती ने आरोप लगाया कि भाजपा केन्द्र में जातिवादी, साम्प्रदायिक, धार्मिक उन्माद, तनाव, हिंसा के साथ-साथ संकीर्ण राष्ट्रवाद की नकारात्मक और घातक नीति तथा कार्यकलापों के आधार पर संविधान मंशा विरोधी तरीके से सरकार चला रही है।

उन्होंने कहा कि उच्चतम न्यायालय की मिल्कियत वाली अधिगृहीत भूमि में यथास्थिति बिगाड़ने का सरकारी प्रयास अनुचित व भड़काऊ है। घोर चुनावी स्वार्थ की राजनीति के तहत यह भाजपा सरकार का नया चुनावी हथकण्डा है।

बसपा नेत्री ने कहा कि देश की सवा सौ करोड़ जनता का विश्वास खोकर बदनाम हो चुकी भाजपा सरकार के पास अब अयोध्या और धर्म के अन्य मामलों का गलत व राजनीतिक इस्तेमाल का आखिरी हथकण्डा बाकी रह गया था जो भाजपा पूरी तरह से इस्तेमाल करने में लग गई है।

उन्होंने दावा किया कि भाजपा को लग गया है कि उत्तर प्रदेश में बसपा-सपा गठबंधन के चलते वह केन्द्र की सत्ता में दोबारा आने वाली नहीं है।

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