N. Korea की ट्रेडिंग व परिवहन से जुड़ी इन कंपनियों पर USA  ने लगाया Ban

इंटरनेशनल डेस्क। अमेरिका ने नार्थ कोरिया पर अब तक की सबसे बड़ी कार्रवाई की है। इस कार्रवाई के फैसले से साफ हो गया है कि नार्थ कोरिया के खिलाफ दबाव की रणनीति को कम नहीं होने दिया जाएगा।
असल में नार्थ कोरिया लगातार मिसाइल व परमाणु परीक्षण कर रहा है और अमेरिका समेत पूरी दुनिया की चेतावनी को नजरअंदाज कर रहा है।
अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने उत्तर कोरिया को आगाह करते हुए कहा कि उत्तर कोरिया पर पहले दौर के प्रतिबंधों के काम न करने पर, दूसरे दौर के प्रतिबंध लगाए जाएंगे।
जो कि दुनिया के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण होंगे। अमरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट ने 28 जलपोत और 9 परिवहन से जुड़ी कंपनियों पर प्रतिबंध लगाया है।

जिन 27 कंपनियों को बैन किया है वह नार्थ कोरिया, सिंगापुर और चीन में रजिस्टर हैं।

नार्थ कोरिया की ट्रेडिंग कंपनियों व जहाजों को किया गया प्रतिबंधित

उल्लेखनीय है कि ट्रंप ने अमेरिकी दौरे पर आए ऑस्ट्रेलियाई प्रधानमंत्री मैलकम टर्नबुल के साथ एक संयुक्त संवाददाता सम्मेलन में कहा, अगर प्रतिबंध काम नहीं करते तो हमें फिर से नए प्रतिबंध लगाने होंगे।

दोबारा लगाए जाने वाले प्रतिबंध बहुत ज्यादा कठोर हो सकते हैं। शायद वे दुनिया के लिए बेहद दुर्भाग्यपूर्ण हों। यूएस ट्रेजरी डिपार्टमेंट की ओर से कहा गया कि इन प्रतिबंधों को उत्तर कोरिया की शिपिंग और ट्रेडिंग कंपनियों व जहाजों को बाधित करने के लिए लगाया गया है, ताकि प्योंगयांग अकेला पड़ जाए।

USA ने जतायी प्रतिबंधों का असर पड़ने की उम्मीद

इस बीच अमेरिका ने प्रतिबंधों का असर पड़ने की उम्मीद जताई है। अमेरिकी राष्ट्रपति ने कहा, श्हमारे फैसले को दुनियाभर से समर्थन मिल है। उत्तर कोरिया मनमानी करने वाला देश है।

वहीं, उत्तर कोरिया के साथ समझौते की बात पर ट्रंप ने कहा, अगर समझौता हो जाता है तो यह बहुत अच्छा होगा। लेकिन अगर ऐसा नहीं हुआ तो आगे कुछ तो होगा।

ट्रंप की बेटी इवांका साउथ कोरिया के दौरे पर

बता दें कि ट्रंप प्रशासन द्वारा की गई घोषणा के वक्त पर भी गौर किया जा रहा है, क्योंकि यह ऐलान ऐसे मौके पर किया गया है जब उनकी बेटी इवांका दक्षिण कोरिया में हैं।

दरअसल, इवांका रविवार को ओलिंपिक खेलों के समापन समारोह कार्यक्रम में अमेरिकी प्रतिनिधिमंडल का नेतृत्व करने पहुंची हैं। उत्तर कोरिया और उसकी मदद करने वालों पर अमेरिका की यह कोई पहली कार्रवाई नहीं है।

इससे पहले पिछले साल अगस्त और जून में भी ट्रंप प्रशासन ने उत्तर कोरिया के मिसाइल कार्यक्रम में मदद करने वाली रूसी और चीनी कंपनियों पर पहले भी बैन लगाया था।

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