इस मसले को लेकर समूचे विपक्ष ने किया विस से बहिर्गमन

लखनऊ । राज्य विधानसभा में मंगलवार को समूचे विपक्ष ने सूबे की सरकार पर गरीब बालिकाओं की शिक्षा के प्रति उदासीन रहने का आरोप लगाते हुए सरकार की जमकर आलोचना की।
विपक्ष ने सरकार पर इस मुद्दे को लेकर सरकार पर गोलमोल उत्तर देने और विषय से भटकाने का भी आरोप लगाया। उधर, सरकार की ओर से साफ कहा गया कि वह बालिकाओं को शिक्षा के लिए पूर्व सरकार में दी जाने वाली कन्या विद्या धन योजना चलाने पर कोई विचार नहीं कर रही है।
प्रश्नकाल के दौरान समाजवादी पार्टी के नितिन अग्रवाल द्वारा पूछे गए सवाल के जवाब में सरकार की ओर से उत्तर देते हुए संसदीय कार्यमंत्री सुरेश कुमार खन्ना ने बताया कि कन्या विद्या धन योजना के लिए राज्य सरकार वित्तीय वर्ष 2017-18 के बजट में कोई प्रावधान नहीं किया है।

उन्होंने कहा कि इस योजना को पूर्ववर्ती सपा सरकार ने वित्तीय वर्ष 2012-13 में लागू की थी। जिसे वित्तीय वर्ष 2013-14 में भी जारी रखा गया।

SAPA ने किया था परिवर्तन

लेकिन बाद में सपा सरकार ने ही इसमें परिवर्तन करते हुए 2015-16 व 2016-17 में मेधावी छात्र योजना प्रारम्भ की। उन्होंने कहा कि गरीब छात्राओं के लिए बनी अपनी ही योजना को सपा सरकार ने मेधावी में परिवर्तित कर दिया।

उन्होंने साफ कहा कि सरकार इस योजना को पुनः प्रारम्भ नहीं करेगी। सरकार ने इसके स्थान पर माध्यमिक षिक्षा परिषद में प्रदेष स्तर पर प्रथम स्थान पाने वालों को परास्नातक तक दो हजार रूपए प्रति माह की छात्रवृत्ति देने का निर्णय लिया है।

इसके अलावा सरकार बच्चों को स्वेटर, जूते-मोजे, स्कूलों में बिजली कनेक्शन, पेयजल आदि की व्यवस्था की है। उन्होंने कहा कि उस योजना से बचे पैसों का सरकार सही जगह इस्तेमाल किया है।

पूर्व में पूरी प्रक्रिया ही दोषपूर्ण थी। इसी विषय पर सपा के संजय गर्ग, नेता प्रतिपक्ष रामगोविन्द चैधरी, बसपा के रामअचल राजभर व कांग्रेस के अजय कुमार लल्लू ने भी सरकार से जवाब तलब किया।

बाद में समूचे विपक्ष ने सरकार पर आरोपों की झड़ी लगाते हुए सदन से बहिर्गमन कर विरोध दर्ज कराया।

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