विधान सभा सदस्यों के आचरण के लिए बनेगी आदर्श आचार समिति

लखनऊ । उप्र विधान सभा के सदस्यों के आचरण को लेकर जनसामान्य में अच्छी धारणा का अभाव होता जा रहा है।
सदन के अन्दर एवं सदन के बाहर के आचरण पर जनता की दृष्टि रहती है। विधान सभा की आचार समिति सदस्यों के आचरण एवं व्यवहार पर आदर्श आचार संहिता बना सकती है।
यह सम्यक विचारोपरान्त आचार संहिता सूचीबद्ध करेगी। ऐसे सुझावों को प्रतिवेदन के रूप में विधान सभा में प्रस्तुत किया जायेगा।
यह बात बुधवार को प्रदेष विधान सभा की आचार समिति की प्रथम उद्घाटन बैठक में विधान सभा अध्यक्ष हृदय नारायण दीक्षित ने कही।
दीक्षित ने कहा कि चुने जाने के पहले प्रत्येक सदस्य एक साधारण नागरिक के रूप में होता है। विधान सभा में सदस्य चुने जाने के बाद वह असाधारण हो जाता है।
सदस्य के आचार-व्यवहार पर उसको चुनने वाले निर्वाचक मण्डल के साथ-साथ पूरे प्रदेश की निगाह होती है। सदन में अन्दर और सदन के बाहर उसके प्रत्येक कृत्य पर सतत एवं सूक्ष्म पर्यवेक्षण होता रहता है।
उन्होंने बताया कि हमारी राजनैतिक प्रणाली में हम अपनी मर्यादायें पालन करके ही आदर पाते है। हाल के वर्षों में राजनीति में कुछ ऐसी प्रवृत्तियों ने प्रभाव डाला है कि राजनीति के प्रति आम जनता का विश्वास घटा है, देश के प्रजातंत्र के लिए शुभ संकेत नहीं है।
आचार समिति विधायकों के लिए आदर्श आचरण एवं व्यवहार संहिता तैयार करते समय इन बिन्दुओं पर विशेष रूप से विचार करेगी। विधायकों का आदर सम्मान बढ़ाना जरूरी है।
इस अवसर पर समिति की बैठक में सोवरन सिंह यादव, अरविन्द गिरि, रत्नाकर मिश्रा, अनूप प्रधान, विजय कुमार कश्यप आदि विधायकों ने भी विचार विमर्श में हिस्सा लिया।
सदस्यों ने यह विश्वास दिलाया कि वे सब सभी अध्यक्ष के मार्गदर्शन में सदस्यों के आचार एवं व्यवहार को लेकर अपना-अपना सुझाव समिति के समक्ष प्रस्तुत करेंगे।
उनका यह प्रयास होगा कि विधान सभा के सदस्यों के लिए एक ऐसी आदर्श आचार संहिता का निर्माण हो जो अन्य विधायिकाओं के लिए भी अनुकरणीय बन सके।
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