प्रो0 शारिब रूदौलवी के सम्मान में ‘जश्न-ए-शारिब’

लखनऊ-लखनऊ विश्वविद्यालय के उर्दू विभाग द्वारा उर्दू के प्रख्यात विद्वान एवं जवाहर लाल नेहरू विश्वविद्यालय, नई दिल्ली के पूर्व उर्दू विभागाध्यक्ष प्रो0 शारिब रूदौलवी के सम्मान में आज समारोह ‘जश्न-ए-शारिब’ का आयोजन विश्वविद्यालय के मालवीय सभागार में किया गया। इस अवसर पर मुख्य अतिथि उत्तर प्रदेश के राज्यपाल राम नाईक, न्यायमूर्ति शबीबुल हसनैन, प्रो0 आरिफ नकवी अध्यक्ष उर्दू अंजुमन जर्मनी, कुलपति प्रो0 एस0पी0 सिंह, विख्यात शायर एवं गीतकार डाॅ0 हसन कमाल,  वकार रिज़वी, उर्दू विभाग के विभागाध्यक्ष प्रो0 अब्बास रज़ा नैय्यर सहित बड़ी संख्या में प्रो0 शारिब रूदौलवी के पूर्व विद्यार्थी भी उपस्थित थे।

राज्यपाल ने प्रो0 शारिब रूदौलवी को शतायु होने एवं सृजनारत रहने की शुभकामनाएं देते हुये कहा कि यह सुखद संयोग है कि प्रो0 शारिब रूदौलवी का सत्कार समारोह उनके पढ़ाये हुये छात्र कर रहे हैं। कम लोगों का ऐसा भाग्य होता है। प्रो0 शारिब रूदौलवी उर्दू साहित्य के लिये एक शानदार हस्ताक्षर हैं। प्रो0 शारिब स्वयं लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र रहे हैं। लखनऊ विश्वविद्यालय के छात्र कैसे होते हैं उसका एक रूप शारिब साहब हैं। ‘मैं प्रो0 शारिब साहब को पहले तो नहीं जानता था उनसे पहचान हुई। मेरी पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ के उर्दू अनुवाद के सिलसिले में उनसे और निकटता बढ़ी। पुस्तक ‘चरैवेति! चरैवेति!!’ ने मुझे अनेक लोगों से जोड़ा है। विद्वान व्यक्ति कितना विनम्र हो सकता है, प्रो0 शारिब उसका उदाहरण हैं। उनके व्यक्तित्व और कृतित्व को बताने के लिये यदि दो शब्दों में कहा जाये तो वे सभ्यता की प्रतिमूर्ति हैं।
न्यायमूर्ति  शबीबुल हसनैन ने कहा कि प्रो0 शारिब के व्यक्तित्व और उनकी सादगी ने दूसरों को सदैव आकर्षित किया है। प्रो0 शारिब रूदौलवी ने कभी जताया ही नहीं कि वे इतने बड़े विद्वान हैं बल्कि सबसे विनम्रता से मिलते हैं। उन्होंने कहा कि उर्दू और लखनऊ के ‘अदब और आदाब’ की वे मुकम्मल किताब हैं।
प्रो0 शारिब रूदौलवी ने कृतज्ञता प्रकट करते हुये कहा कि ‘जज्बात का इजहार करने के लिये लब्ज नहीं हैं। आज यहाँ राज्यपाल उपस्थित हैं जो विश्वविद्यालय के कुलाधिपति हैं और कुलपति भी यहाँ मौजूद हैं। मैं क्या हूँ, कहाँ तक पहुंचा हूँ वह सब इस विश्वविद्यालय की देन है। इसी जगह से अपने शिक्षकों को सुना है जिन्होंने मुझे पढ़ना सिखाया। मैं पहले भी सीखता था और आज भी सीखता हूँ। सिर्फ आगे बढ़ने से ही मंजिल मिलती है।’ उन्होंने अपने छात्रों को सम्बोधित करते हुये कहा कि यह सोचने का विषय है कि आप आने वाली पीढ़ी को क्या दे रहे हैं, विद्यार्थी की सफलता में गुरू की बहुत अहम भूमिका होती है।
प्रो0 आरिफ नकवी ने अपनी पुरानी यादें ताजा करते हुये प्रो0 शारिब के साथ लखनऊ विश्वविद्यालय में बिताये दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि प्रो0 शारिब रूदौलवी आज उर्दू के सबसे बड़े प्रगतिशील समालोचक हैं।
इस अवसर पर कुलपति प्रो0 एस0पी0 सिंह, प्रो0 जफरूद्दीन व डाॅ0 हसन कमाल सहित अन्य लोगों ने भी अपने विचार रखे। कार्यक्रम का संचालन उर्दू विभागाध्यक्ष डाॅ0 अब्बास रज़ा नैय्यर ने किया।

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